Monday, June 24, 2024
HomeUttar PradeshAgraहारी नहीं मैं नारी हूं अपने घर की फुलवारी हूं

हारी नहीं मैं नारी हूं अपने घर की फुलवारी हूं

दर्पण व्यू संवाद
आगरा। राष्ट्र की प्रगति व सामाजिक स्वतंत्रता में शिक्षित महिलाओं की भूमिका उतनी ही अहम है जितनी कि पुरुषों की। इतिहास इस बात का प्रमाण है कि जब-जब नारी ने आगे बढ़कर अपनी बात सही तरीके से रखी है, समाज और राष्ट्र ने उसे पूरा सम्मान दिया है और आज की नारी भी अपने भीतर की शक्ति को सही दिशा निर्देश दे रही है। वर्तमान में महिलाओं की नई सोच के साथ आगे बढ़ते देखा जा रहा है। अधिकारों को लेकर वे जागरूक है। आज समाज में लैंगिक समानता को प्राथमिकता देने से भी लोगों की सोच में बहुत भारी बदलाव आया है।

कुछ अलग करने की मंशा ने बनाया अधिकारी
आज के समय में ऐसा कोई काम नहीं है जिस काम को महिलाएं न कर रही हो। संविधान में महिलाओं को पुरुषों के बराबर ही समान अधिकार प्राप्त हैं। एक महिला शिक्षित होती है तो पूरे परिवार शिक्षित होते हैं। शिक्षा प्राप्त करके महिलाएं अपने बल बुद्धि प्रयोग से हर दिशा में काम कर रही हैं। रेलवे में सीनियर डीपीओ के पद पर तैनात मानसी वर्मा वर्ष 2011 बैच की आईआरपीएस अधिकारी हैं। दिल्ली मूल की मानसी के पिता रिटायर्ड आईएएस अधिकारी और बड़ी बहन यूपी कैडर में आईएएस अधिकारी हैं। मानसी दिल्ली आईआईटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की है।

मानसी वर्मा, सीनियर डीपीओ

 

सबको करना होगा अपना किरदार तय

आज देश में महिलाएं प्रत्येक क्षेत्र में अपना किरदार तय कर रही हैं। यह होना भी चाहिए। पहले इंजीनियरिंग औ र रेल सेवा को अधिकांशत: पुरुष प्रभुत्व वाली सेवाएं माना जाता था। यहां आज महिलाएं अपनी काबिलियत के बल पर एक से बढ़कर एक पद पर काम कर रही हैं। मंडल वाणिज्य प्रबंधक व जनसंपर्क अधिकारी प्रशस्ति श्रीवास्तव वर्ष2017 बैच की अधिकारी हैं। उनके पिता प्रांतीय सिविल सेवा के अधिकारी रहे हैं। बचपन से ही उन्होंने सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य तय कर  लिया था और आज भी भारतीय सिविल सेवा में जाने के लिए जी तोड़ मेहनत करने में जुटी हुई है।

प्रशस्ति श्रीवास्तव, डीसीएम व जनसम्पर्क अधिकारी

 

अपनी क्षमताओं को पहचानें महिलाएं
इक्कीसवीं सदी नारी के जीवन में सुखद संभावनाएं लेकर आई है। नारी अपनी शक्ति को पहचानने लगी है वह अपने अधिकारों के प्रति जागरुक हुई है। लेकिन यहां हम इस कटु सत्य से मुंह नहीं मोड़ सकते कि महिलाओं को आज भी पुरुषों की तुलना में कम मजदूरी

मिलती है। इसलिए अपनी क्षमताओं को पहचाना होगा। आरपीएफ में वर्ष 2020 नियुक्ति पा चुकीं रीना हैं। रीना नई दिल्ली मूल की हैं और बीएससी (गणित) किया है। नौकरी से पूर्व बच्चों का पढ़ाने का काम किया है। पिता आॅटो चालक हैं और अपने भाई को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए वे संकल्पित हैं।
रीना, कांस्टेबल, आरपीएफ

 

खुद के साथ औरों को भी करें जागरूक
महिलाओं को आत्मनिर्भर होना होगा। जीवन में गलत होने का विरोध करना चाहिए। जो भी नौकरी पेशेवर महिलाएं हैं उन्हें अन्य महिलाओं को भी जागरूक करने की दिशा में काम करना चाहिए। वाणिज्य विभाग में वरिष्ठ लिपिक के पद पर तैनात मृदुलता ने वर्ष 2013 में रेलवे जॉइन किया था। आपको बता दें कि मृदुल लता राज्य स्तरीय क्रिकेट खिलाड़ी भी हैं और अंडर-19 यूपी महिला टीम की फिटनेस ट्रेनर भी हैं। परिवार और रेल सेवा के बीच सामंजस्य के साथ काम करने को प्राथमिकता देती हैं।
मृदुलता, वरिष्ठ लिपिक, वाणिज्य विभाग

 

 

समाज की हर महिला होती है विशेष
आज की महिला निर्भर नहीं हैं। वह हर मामले में आत्मनिर्भर और स्वतंत्र हैं और पुरुषों के बराबर सब कुछ करने में सक्षम भी हैं। हमें महिलाओं का सम्मान जेंडर के कारण नहीं, बल्कि स्वयं की पहचान के लिए करना होगा। हमें यह स्वीकार करना होगा कि घर और समाज की बेहतरी के लिए पुरुष और महिला दोनों समान रूप से योगदान करते हैं। हर महिला विशेष होती है, चाहे वह घर पर हो या आॅफिस में। अलीगढ़ के इगलास मूल की रहने वाली रजनेश वर्ष 2015 से रेल सेवा में हैं। गांव की वह एक मात्र नौकरीपेशा महिला हैं। पूरे परिवार और गांव का उन्होंने मान बढ़ाया है।
रजनेश, कांस्टेबल, आरपीएफ

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