Tuesday, June 18, 2024
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महिला दिवस: बुलंद हौंसलों के साथ बनाई है पहचान

दर्पण व्यू संवाद
आगरा। महिलाएं हमारे जीवन में कई अहम रोल निभाती हैं। कभी मां के रूप में तो कभी बहन के रूप में, तो कभी एक पत्नी के रूप में देखते हैं।
इस दिन दुनियां भर में महिलाओं के जीवन में सुधार लाने, उनकी जागरुकता बढ़ाने जैसे कई विषयों पर जोर दिया जाता है। आज के समय में महिलाओं ने अपनी उन्नति को लेकर काफी बढ़ोत्तरी की है।

मथुरा मूल की सविता सिंह ने वर्ष 2014 में बारहवीं कक्षा में पढ़ाई खत्म करने के बाद ही जीएनएम की पढ़ाई की। स्वास्थ सेवाओं में वर्ष 2016 से सेवा कर रहीं हैं। सविता का कहना है कि बचपन में महिला शिक्षिकाओं को पढ़ाते हुए देखा, पिता के साथ इंडियन नेवी में महिलाओं को वर्दी में देखा, तभी से अपना कुछ अलग करने का मन बनाया। प्रादेशिक स्वास्थ्य सेवा में नर्स के रूप में काम कर रही हूं कभी खुद को अलग नहीं समझा अपने काम पर गर्व है काम कोई छोटा बड़ा नहीं होता एक नर्स के रूप में ़मरीजों की सेवा में सेवारत हूं।
सविता सिंह, नर्स

वर्ष 2018 बैच की भारतीय रेलवे इंजीनियरिंग सेवा की अधिकारीं दिशा अग्रवाल आगरा मूल की हैं। उन्होंने दिल्ली में रह कर अपनी पढ़ाई पूरी की है। उनका कहना है कि भारतीय नारी ने जिस नई सोच, नई नैतिकता, नए मूल्यों, नए प्रतिमानों और कीर्तिमानों में खुद को स्थापित किया है। वर्तमान में विज्ञान, तकनीकी, चिकित्सा, खेलकूद, मीडिया और मनोरंजन उद्योग में महिलाओं ने अपनी काबिलियत को दर्शाया है। महिलाओं के लिए रेल सेवा इतनी कठिन नहीं है यदि हौंसले बुलंद हों तो हर काम में जीत मिलती है। आज बड़ी संख्या में महिलाएं रेल सेवा में हैं और परिवार के साथ रेल सेवा को भी जिम्मेदारी के साथ निभा रहीं है।
दिशा अग्रवाल, एडीईई, ओपी, आगरा मंडल

ताजनगरी के बेलनगंज मूल की रितु गोयल ने लेखन और काव्य के क्षेत्र में बड़ी नाम कमाया है। यह स्वयं की लगन के चलते संभव हो सका। वहीं उन्होंने अपनी बेटी रूपाशी को भी एमबीए कराया और वह भी विदेशी कंपनी में जॉब कर रही है। उनका कहना है कि कोई भी राष्ट्र सही दिशा में संतुलित और सतत् विकास चाहता है तो लैंगिक असमानता को दूर करना ही होगा। दुनियां के देशों में महिलाओं की स्थिति ही भविष्य के विश्व की उन्नति और समृद्धि तय करेगी। भारतीय महिलाओं ने अपनी दुनियां अपने संघर्षों के बल पर बनाई है।
रितु गोयल, कवियत्री व समाजसेविका

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