Sunday, June 23, 2024
HomeUttar PradeshAgra50 लाख की रिश्वत के लिए बर्बाद कर दिया बड़ा कारोबारी

50 लाख की रिश्वत के लिए बर्बाद कर दिया बड़ा कारोबारी

– औषधि विभाग के आला अधिकारी की करतूत
– कभी सबसे बड़ा राजस्व देता था माधव ड्रग हाउस
– षडयंत्र रचकर कारोबार को चौपट करवा दिया

आगरा। औषधि विभाग की ऐसी करतूत सामने आई है, जिसमें सबसे बड़े दवा कारोबारी को रिश्वत की मांग पूरी न होने पर बर्बाद कर दिया गया। कभी माधव ड्रग हाउस आगरा में सबसे अधिक राजस्व देने वाली फर्म थी जो आज पूरी तरह से बर्बाद हो गई। लंबी लड़ाई लड़ने के बाद फर्म संचालकों को न्याय तो मिला, लेकिन अब तक सब कुछ चौपट हो गया है। कारोबार ठप है, नामचीन दवा कंपनियों की डिस्ट्रीब्यूटरशिप छिन चुकी है। लगातार मानसिक प्रताड़ना झेल रहे फर्म स्वामी बीमार हो गए। शासन को जीएसटी के रूप में मिलने वाले करोड़ों के राजस्व का नुकसान हुआ, वह अलग से।
थाना कोतवाली के सामने स्थित गोगिया मार्केट में माधव ड्रग हाउस का मामला है। करीब डेढ़ दर्जन बड़ी दवा कंपनियों की डिस्ट्रीब्यूटरशिप इस फर्म के पास थी और फर्म जीएसटी के रूप में दवा कारोबारियों के बीच सबसे अधिक जीएसटी भरने वाली फर्म हुआ करती थी। 17 जुलाई, 2021 से फर्म के बुरे दिनों की शुरूआत हुई। औषधि विभाग ने यहां जांच की थी। दरअसल पूरे मामले की पीछे कहानी दूसरी थी। फर्म संचालक से औषधि विभाग के एक आला अधिकारी ने कथित रूप से 50 लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी। रिश्वत की मंशा पूरी करने के लिए टीम को जांच के लिए यहां भेजा गया था। कोई अनियमितता नहीं मिली, पर आला अधिकारी मांग पूरी न होने की वजह से फर्म संचालक को सबक सिखाने पर अमादा थे। इसके लिए कहानी रची गई। औषधि विभाग की टीम ने यहां से बरामद इंजेक्शन अधोमानक बता दिए। रिपोर्ट में कोल्ड चेन में रखे जाने वाले इंजेक्शनों को ऊबलता हुआ दिखा दिया गया। 122 नग इंजेक्शन बरामद होना दिखाया गया। जब्त माल को जब कोर्ट में खोला गया तो 91 इंजेक्शन ही मिले। आइस पैक भी साथ थे। इस मामले में औषधि निरीक्षक को कोर्ट में माफी मांगनी पड़ी थी। लेकिन तब तक फर्म का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया था। इसका नतीजा यह रहा कि सभी कंपनियों की डिस्ट्रीब्यूटरशिप छिन गई। रिश्वत के बल पर प्रतिस्पर्धी फर्मों ने आला अधिकारी के संरक्षक के चलते डिस्ट्रीब्यूटरशिप हासिल कर लीं। इधर माधव ड्रग हाउस पूरी तरह से बर्बाद हो गया।
दवा कारोबारी के अधिवक्ता राहुल राठोर, फर्म संचालक नवीन अरोड़ा ने बताया कि फर्म के कम्प्यूटरों से डाटा उड़ाने के लिए हैकर्स की मदद ली गई। सबूत के तौर पर इस पूरे कृत्य की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग उनके पास मौजूद है। एकतरफा कार्रवाई करके लाइसेंस निलंबित कर दिया गया। फर्म के पक्ष को सुना ही नहीं गया। फर्म संचालक और उनके परिवार के सदस्यों का लगातार उत्पीड़न किया गया। लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद फर्म ने लाइसेंस तो बहाल करवा लिया, लेकिन जिस जिम्मेदार सरकारी अमले ने षडयंत्र बतौर फर्म संचालक के कारोबार को चौपट कराया, उन अधिकारियों के खिलाफ कोई कारवाई नहीं हुई। नवीन अरोड़ा करते हैं कि उनके परिवार की प्रतिष्ठा गिरी, परिजनों को निजी हानि हुई। उनका पक्ष सुना ही नहीं गया और फर्म को बदनाम कर दिया गया।
आगरा फार्मा ऐसोसिएशन के अध्यक्ष ओम प्रकाश, महामंत्री महेश अग्रवाल, कोषाध्यक्ष संदीप गुप्ता, अभिषेक अग्रवाल आदि का कहना है कि वास्तव में दवा कारोबारी के साथ बहुत बड़ा अन्याय हुआ है। औषधि विभाग की करतूत से फर्म का कारोबार आज शून्य है। दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी ही चाहिए।

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