Monday, June 24, 2024
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मौलवियों को रास नहीं आ रहा मदरसों का सर्वे

उठा रहे सवाल, शिशु मंदिरों का भी हो सर्वे

आगरा। मदरसों के सर्वे शुरू हो गया है। मदरसों में सर्वे टीमें पहुंच रही हैं। वे 12 बिन्दुओं पर जानकारी एकत्रित कर रही है। पंजीकृत और अपंजीकृत मदरसों के बारे में पूरी जानकारी जुटाई जा रही है, पर यह सर्वे मौलवियों को यह सब रास नहीं आ रहा है। वे सवाल उठा रहे हैं।
मदरसा दारुस्सलाम के मुफ्ती इमरान कुरैशी ने सर्वे का स्वागत किया है। उनका कहना है कि सरकार को भी मदरसों की मदद करनी चाहिए। गुरुवार को जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने बिना मान्यता के चलने वाले मदरसा दारुस्सलाम का सर्वे किया। टीम मदरसे में आधा घंटा रुकी। टीम ने 12 पॉइंट्स पर मदरसे के संचालक और मुफ्ती से जानकारी ली। मदरसे के मुफ्ती इमरान कुरैशी ने कहा कि उन्हें इस सर्वे से कोई ऐतराज नहीं है। वो सरकार के इस कदम का स्वागत करते हैं। मगर, सर्वे की कार्रवाई के बाद उम्मीद करते हैं कि सरकार बिना मान्यता वाले मदरसों को भी सहयोग देगी। मदरसों की स्थिति को सुधारा जाएगा। उनके मदरसे में अरबी, उर्दू के साथ कंप्यूटर, अंग्रेजी व हिंदी भी पढ़ाई जाती है।
मदरसा मोईन उल इस्लाम के प्रधानाचार्य मौलाना उजेर अलाम का कहना है कि बिना मान्यता के चलने वाले मदरसों की जांच का स्वागत करते हैं। प्रदेश सरकार से मांग है कि सर्वे के बाद मदरसों की स्थिति को सुधारने का काम किया जाए।
इधर दूसरे अन्य मौलवियों ने सवाल भी उठाए हैं। वे इसके विरोधी हैं, पर फिलहाल खुलकर सामने नहीं आना चाहते। उनका कहना है कि शिशु मंदिरों का भी सर्वे हो।

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