Sunday, June 23, 2024
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सड़कों पर घूम रही शोर वाली हिंसा

आगरा। आजकल शहर की सड़कों पर शोर वाली हिंसा घूम रही है। इस हिंसा में शहरी युवा काफी आगे हैं। वह अपने वाहनों में प्रेशर हार्न व मोडिफाइड साइलेंसर लगाने का फैशन पर फिदा हो चले हैं। जिसके चलते आम नागरिकों के कान के पर्दे भी हिल रहे हैं। इनके चलन का कारण पुलिस प्रशासन की सुस्ती है। इन पर काफी लंबे समय से इक्का-दुक्का लोगों को छोड़कर पुलिस व प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की है। जिसके चलते पूरा शहर कानफोडू शोर की गिरफ्त में आ गया है। शोर इतना कर्कश होता है कि बुजुर्ग और दिल के मरीजों की धड़कन तेज होती है। शहर के गली मोहल्लों से लेकर बच्चों के पार्क और यहां तक कि अस्पताल के बाहर भी बुलेट और मोडिफाइड टू व्हीलर व चार पहिया वाहन में लगे प्रेशर हॉर्न लोगों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। प्रेशर हार्न व साइलेंसर के जरिए बाइकर्स 135-145 डेसीमल तक का ध्वनि प्रदूषण फैला रहे हैं। जो लोगों की सुनने की शक्ति को नुकसान पहुंचा सकता है। कई डिजीज को जन्म दे रहा है। डाक्टर्स की माने तो दस परसेंट तक ईयर पेशेंट की बढ़ोतरी हुई है। जो तेज ध्वनि के शिकार है। तेज ध्वनि के कानों पर अचानक से पड़ने पर कानों का कोटिला तक खराब हो सकता है। इसके साथ रैनाइटरा डिजीज हो सकती है। जिसमें कानों में हमेशा सीटी बजने जैसी आवाज सुनाई देती है। मल्टीटोन हार्न एक इलेक्ट्रानिक डिवाइसहै। ये टू व्हीलर व फोर व्हीलर में लगता है। इसमें साउंड बदला जा सकता है। पुलिस सायरन, प्रेशर हार्न, एंबुलेंस हार्न आदि इसमें आते हैं मार्केट में फिल्मी गानों के म्युजिकल हार्न भी है। नार्मली बीप को छोड़कर अन्य सभी हार्न मल्टीटोन हार्न माने जाते हैं। वहीं मामले में संबधित विभाग का कहना है कि नियमों के अनुसार वाहन में 75 डेसीबल से ज्यादा साउंड नहीं होना चाहिए। मल्टीटोन हार्न लगाकर घूम रहे वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। मल्टीटोन हार्न लगाना व बेचना गलत है। कितना शोर होना चाहिए। जबकि नियमानुसार इंडस्ट्रियल जोन में 70 डेसीबल, कामर्शियल जोन में 65, रेजीडेंशियल जोन में ५५ और साइलेंस जोन में ५० से ४० डेसीबल तक शोर होना चाहिए।
बचाव के लिए क्या कर
ईयर प्लग्स का प्रयोग करें। इससे कान हाई साउंड से सेफ रहते हैं। खुद अवेयर हों। वाहनों में लगे मल्टीटोन हार्न हटाएं और परिचितों के वाहनों से भी हटवाएं। अगर किसी गाड़ी में मल्टीटोन हॉर्न लगा दिखाई दे तो तुरंत आरटीओ या पुलिस को सूचित करें।

प्रेशर हॉर्न व मोडिफाइड वाहनों पर दस हजार रुपये तक जुमार्ने की कार्रवाई का प्रावधान है। प्रेशर हार्न को लेकर पहले भी अभियान चलाया गया था। आगे भी ऐसे वाहनों की धरपकड कर कार्रवाई की जाएगी।

आनंद ओझा, यातायात प्रभारी निरीक्षक

ईयर पेशेंट में बीस प्रतिशत पेशेंट तेज हार्न के चलते डिजीजेस के शिकार होते हैं। ओपीडी में रोजाना कई मरीज आते हैं। इनमें से कुछ मरीज तेज हार्न व शोर के चलते बीमार होते हैं। तेज आवाज से कानों नस खराब हो सकती है। जिसमें कानों में हमेशा सीटी बजने जैसी आवाज सुनाई देती है। यदि मानक को देखा जाए तो सडक पर ६० डेसीबल से ज्यादा का साउंड नहीं होना चाहिए।
डा. अतुल जैन, ईएनटी स्पेशलिस्ट

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