Saturday, June 22, 2024
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विश्वविद्यालय : फर्जी बिल बनेंगे प्रो. पाठक के खिलाफ बड़े सबूत

सत्यापन में खुली पोल, कभी माल की सप्लाई हुई ही नहीं
करोड़ों की खरीद में अधिकारियों, कर्मचारियों से पूछताछ

आगरा। डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में काम करने वाली डिजीटेक्स एजेंसी की कारगुजारियों की पोल निरंतर खुल रही है। यह वह ऐजेंसी हैं, जो पूर्व कुलपति प्रो. विनय पाठक के कार्यकाल में सक्रिय रही। इस ऐजेंसी के माध्यम से कमीशनखोरी का मोटा खेल खेला गया। पूर्व कुलपति प्रो. विनय पाठक के खिलाफ दर्ज हुई रिपोर्ट की जांच कर रही एसटीएफ ने विश्वविद्यालय में हुई खरीद के बिलों का सत्यापन किया था। इस दौरान यह बिल फर्जी पाए गए। रविवार को विश्वविद्यालय खुलवाकर एसटीएफ ने जांच की थी। कई अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की। आज भी सुबह से एसटीएफ की जांच जारी है। प्रो. पाठक के कार्यकाल (जनवरी से सितंबर) तक परिणाम बनाने वाली डिजीटैक्स टेक्नोलॉजीज इंडिया प्राइवेट कंपनी को किए गए भुगतान के बिल फर्जी पाए गए हैं। अब तक करीब चार करोड़ रुपये के बिलों का सत्यापन हो चुका है, जो फर्जी हैं। जांच के दौरान जानकारियां जुटाई गईं कि एजेंसी को किस तिथि में कितनी धनराशि जारी की, कितने कार्य होने पर धनराशि देनी थी, किस खाते से रुपया स्थानांतरित किया।

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