Thursday, June 13, 2024
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पनवारी कांड पहुंचा हाईकोर्ट

पनवारी कांड को लेकर हाईकोर्ट में की गई अपील की जानकारी देते
सपोर्ट इंडिया के अध्यक्ष सुरेशचंद्र सोनी एडवोकेट और जाटव महापंचायत के पदाधिकारी।

 निचली अदालत के फैसले से संतुष्ट नहीं जाटव महापंचायत

 भाजपा विधायक समेत अन्य आरोपियों को कर दिया था बरी

आगरा। चर्चित पनवारी कांड हाईकोर्ट में पहुंच गया है। 32 वर्ष बाद 3 माह पहले आगरा की अदालत ने इस पर फैसला सुनाया था। साक्ष्य न मिलने पर भाजपा विधायक समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। इस निर्णय से क्षुब्ध होकर जाटव महापंचायत ने हाईकोर्ट में अपील दर्ज कराई है। जो लोग बरी हुए थे, उनमें जाटव महापंचायत के वरिष्ठ नेता भी थे।
1990 में हुआ पनवारी कांड का मामला फिर गर्मा गया है। पनवारी कांड के दोषियों को आगरा की अदालत ने बाइज्जत बरी कर दिया था। सपोर्ट इंडिया के अध्यक्ष सुरेश चंद सोनी एडवोकेट ने इस निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दर्ज कराई है। अपील भरत सिंह की ओर से दाखिल की गई है। एडवोकेट सोनी ने बताया कि हाईकोर्ट में दो जजों की पीठ ने पहली ही तारीख में अपील को एडमिट कर लिया है। सुनवाई के लिए आदेश भी कर दिए हैं। आगरा की अदालत को सभी रिकॉर्ड पेश करने को कहा गया है। साथ ही राज्य सरकार से भी जवाब मांगा गया है। जाटव महापंचायत के अध्यक्ष धर्मपाल सिंह, राजकुमार सिंघाल, सुरेंद्र केन, भरत सिंह आदि मौजूद रहे। एडवोकेट सोनी ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट की नजीरों के मुताबिक यदि ऐसे केस में यदि एक भी गवाह विश्वसनीय होता है तो सजा के लिए पर्याप्त है। जबकि इस केस में दर्जनों गवाह विश्वसनीय है। तत्कालीन डीएम और एसएसपी ने अच्छी गवाही दी है। आरोपियों को सजा न देकर छोड़ा गया है। इससे झुब्ध होकर अपील दायर की गई है। उन्होंने बताया कि दस वर्ष पहले मुकदमे की केस डायरी गायब हो गई थी। इसमें गवाही नहीं होनी चाहिए थी। यह हिंदुस्तान का ऐसा पहला केस है, जिसमें केस डायरी न होने पर गवाही हुई है।
जाटव महापंचायत ने अपने ही समाज के 3 लोगों पर केस में गलत गवाही देने का आरोप लगाया है। एडवोकेट सोनी ने कहा कि आरोपियों को बरी कराने का श्रेय जाटव समाज के तीन लोगों को जाता है। इन लोगों ने समाज की पीठ में छुरा भौंकने का काम किया है। इन लोगों में पूर्व सांसद रामजीलाल सुमन (सपा के राष्ट्रीय महासचिव), करतार सिंह भारतीय एडवोकेट और भाजपा नेता सुभाष भिलवाली ने गलत गवाही दी है। समाज के लोगों से अपील की कि इन लोगों से दूरी बनाकर रखी जाए।

यह है पूरा मामला
आगरा। दरअसल 22 जून 1990 को सिकंदरा के गांव पनवारी में दलित समाज के चोखेलाल की बेटी की बारात चढ़नी थी। इस दौरान पथराव, फायरिंग और आगजनी के बाद क्षेत्र में कर्फ्यू लगाना पड़ा था। बरात नगला पदमा हरी नगर से पनवारी गई थी। गांव में ऐलान कर दिया गया था कि बारात नहीं चढ़ने देंगे। इस पर बवाल हो गया और जातीय संघर्ष बढ़ गया। पूरे प्रदेश में पनवारी कांड पर राजनीति गर्मा गई थी। मुख्य आरोपी चौ. बाबूलाल समेत कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। मामले में 12 अप्रैल 2006 को तत्कालीन स्पेशल जज जनार्दन गोयल ने मुख्य आरोपी चौधरी बाबूलाल, विक्रम सिंह, रघुनाथ सिंह, बच्चू सिंह, रामवीर, बहादुर सिंह, रूप सिंह, देवी सिंह, बाबू सिंह, रामऔतार, शिवराम, भरत सिंह, श्यामवीर और सत्यवीर के खिलाफ आरोप तय किए थे। मुकदमे के विचारण के दौरान दो अभियुक्तों की मृत्यु हो गई। मुख्य आरोपी भाजपा विधायक चौधरी बाबूलाल समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ एमपी -एमएलए कोर्ट में सुनवाई हुई। विशेष न्यायाधीश ने आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य न होने पर उन्हें बरी कर दिया था।
पनवारी गांव में इस कांड के दौरान तत्कालीन डीएम अमल कुमार वर्मा और एसएसपी कर्मवीर सिंह तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री रामजीलाल सुमन ने बारात चढ़वाने का प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली थी। दंगा भड़कने पर पुलिस ने कार्रवाई की तो कई निर्दोष भी फंस गए। कई नाबालिग भी जेल में बंद कर दिए। हिंसा के समय हथियारबंद लोग शामिल थे। मकानों की छतों और तिराहे तथा चौराहों पर मोर्चाबंदी कर ली गई थी। स्थिति कंट्रोल करने के लिए सेना बुलाई गई थी।

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