Sunday, June 23, 2024
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विश्वविद्यालय : घोटाले तो अभी और भी बहुत हुए हैं

पूर्व कुलपति द्वारा नियुक्त ऐजेंसी दैनिक वेतन भोगियों से मांगती रिश्वत
130 कर्मचारियों से वेतन के नाम पर लिए जा रहे थे दो-दो हजार रुपए
कर्मचारी नेता की शिकायत पर कुलाधिपति कार्यालय ने लिया है संज्ञान

आगरा। विश्वविद्यालय में घोटालों के उजागर होने का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। अब एक नया मामला सामने आया है, जिसकी जांच भी एसटीएफ को सौंप दी गई है। पूर्व कार्यवाहक कुलपति के कार्यकाल में हुए घोटाले को लेकर कुलपति प्रो. आशु रानी से रिपोर्ट मांगी गई है। सूत्रों का कहना है कि पूर्व कार्यवाहक कुलपति प्रो. विनय पाठक के कार्यकाल में दिल्ली की एक ऐजेंसी को नियुक्त किया गया था। ऐजेंसी संचालक प्रो. पाठक के खास थे। शिकायत की गई कि दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों से दो-दो हजार रुपए की रिश्वत वेतन देने के नाम पर वसूल की जा रही थी। कर्मचारी नेता डा. आनंद टाइटलर ने इस मामले में कुलाधिपति से शिकायत की गई थी। कुलाधिपति कार्यालय ने इस पर संज्ञान लेते हुए कुलपति को पत्र भेजकर रिपोर्ट मांगी है। साथ ही कुलाधिपति के विशेष कार्यधिकारी डा. पंकज एल.जानी ने एसटीएफ के एसपी को भी इस मामले की जांच के लिए पत्र लिखा है। बता दें कि करीब 130 दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी विश्वविद्यालय में काम कर रहे हैं। इन्हीं से दो-दो हजार रुपए वेतन देने के नाम पर लिए जाते थे। प्रो. विनय पाठक के मामलों की जांच एसटीएफ कर रही है। विश्वविद्यालय से लगातार साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। कुलपति से अब तक कई मामलों में रिपोर्ट मांगी जा चुकी है। कितने कालेजों को संबद्धता दी, कालेजों का भौतिक सत्यापन किस समिति ने किया, परीक्षा केंद्रों को किस आधार पर चुना गया, एजेंसी की क्या संलिप्तता थी, कितने करोड़ रुपये का भुगतान किया गया आदि बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी गई है। कालेजों की सूची से लेकर परीक्षा केंद्रों की जानकारी तक उपलब्ध कराई गई है। अब जांच में भ्रष्टाचार का एक और बिन्दू भी जुड़ गया है।

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