Tuesday, June 18, 2024
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विवि घोटाला : गोपनीय प्रकाशन के नाम पर उड़ाए गए छह करोड़ रुपये

एक-एक कर सामने आ रहे हैं प्रो. पाठक के समय के कारनामे
हैरानी है कि भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूतों पर भी कार्रवाई नहीं हुई

आगरा। डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के पूर्व कार्यवाहक कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के कार्यकाल के काले कारनामे एक-एक कर सामने आ रहे हैं। अब नया मामला छह करोड़ रुपए के बंदरबांट का है। गोपनीय प्रकाशन के नाम पर यह खेल हुआ। हर कोई हैरान है कि भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूतों के बाद भी राज भवन खामोश है। नए मामले के अनुसार प्रो. पाठक जाते-जाते भी अजय मिश्रा की एजेंसी को छह करोड़ रुपये का भुगतान गोपनीय प्रकाशन के नाम पर कर गए। एसटीएफ की जांच में यह खुलासा हुआ है। बता दें कि विश्वविद्यालय में परीक्षाओं से पहले प्रश्नपत्र प्रकाशन के लिए गोपनीय ठेका उठाया जाता है। यह ठेका किस एजेंसी को दिया जाएगा, यह निर्णय कुलपति अपने स्तर से लेते हैं। इसके भुगतान का आडिट भी नहीं होता है। प्रो. पाठक के कार्यकाल में यह ठेका अजय मिश्रा की एजेंसी को दिया गया था। अजय मिश्रा की एजेंसी को ही डिग्री और अंकतालिका का काम करने का ठेका भी दिया गया था। नोडल केंद्रों पर आरएफआइडी लाक भी अजय मिश्रा की ही एजेंसी ने लगाए थे, जिनका किराया 25 लाख रुपये का भुगतान किया गया था।

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