Tuesday, June 18, 2024
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प्रो. पाठक ने पत्रावलियों पर खुद नहीं दूसरों से कराए थे हस्ताक्षर

एसटीएफ की जांच में सामने आ रहे चौंकाने वाले तथ्य
अभी तक राजभवन से कार्रवाई न होने पर सभी हैरान

आगरा। डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में नियमानुसार काम नहीं हो रहे थे। अब नया खुलासा यह हुआ है कि विवादित फैसलों में पूर्व कुलपति प्रो. विनय पाठक पत्रावलियों पर खुद हस्ताक्षर नहीं करते थे। वे दूसरों से हस्ताक्षर कराते थे। प्रो. विनय कुमार पाठक अपने कार्यकाल की अंतिम कार्य परिषद की बैठक में भी कई विवादित फैसले कराए। उन्होंने खुद कार्यवृत्त पर भी हस्ताक्षर नहीं किए। पत्रावली पर प्रति कुलपति के हस्ताक्षर हैं। विगत 12 सितंबर को कार्य परिषद की बैठक हुई थी। इसमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इन निर्णयों में संविदा शिक्षकों की नियुक्ति, आर्यभट्ट, फरह स्थित राजकीय कालेज में रखे शिक्षक के वेतन और विवेकानंद इनक्यूबेशन फाउंडेशन में इनक्यूबेशन मैनेजर का वेतन आदि शामिल हैं। इन निर्णयों पर एसटीएफ की नजर है, जैसे नियुक्ति में रोस्टर का पालन न करना, संविदा शिक्षकों को मनमाने तरीके से अलग-अलग अवधि के लिए नियुक्त करना, फरह स्थित राजकीय कालेज में 40 हजार प्रतिमाह पर शिक्षक रखा गया है, जबकि वित्त समिति से 35 हजार ही अनुमोदित हैं। इनक्यूबेशन मैनेजर को 75 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन पर नियुक्ति दी गई है। मैनेजर को फार्मेसी के निदेशक डा. बृजेश तिवारी के बराबर वेतन दिया जा रहा है, जबकि प्रधान महालेखाकार ने डा. तिवारी के वेतन (65 हजार रुपये प्रतिमाह) पर भी आपत्ति लगाई थी। प्रो. पाठक ने 30 सितंबर को अपना कार्यभार छोड़ा था, तो 12 सितंबर को हुई बैठक के कार्यवृत्त पर हस्ताक्षर क्यों नहीं किए और प्रति कुलपति प्रो. अजय तनेजा से हस्ताक्षर क्यों कराए गए? डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में व्याप्त भष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं पर सिविल सोसाइटी आफ आगरा ने कुलाधिपति और कुलपति से श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। सोसाइटी ने कहा है कि यह जनमानस का मुद्दा है और बहुत लोगों को प्रभावित करता है। सोसाइटी के सदस्यों का कहना है कि विवि में व्याप्त भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें सन 2019 से लगातार विभिन्न पटलों पर उठती रही है। जो भी आरोप संस्था ने विश्वविद्यालय प्रशासन और खासकर डा. अरविंद दीक्षित और प्रो. विनय कुमार पाठक और उनके सहयोगियों पर लगाये वो सब सच साबित हो रहे हैं। डा. दीक्षित और प्रो. पाठक के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाए। भ्रष्टाचार स्थापित होने पर दोनों से रिकवरी की कार्रवाई हो। सदस्यों ने कहा कि कुलाधिपति क्यों मजबूर हैं? उन्होंने अभी तक प्रो. पाठक को पद से बर्खास्त क्यों नहीं किया है? प्रो. पाठक व अन्य शिक्षकों, अधिकारियों के आरोपों पर श्वेत पत्र जारी किया जाए।

पार्किंग निर्माण, एसी खरीद में फर्जीवाड़ा
आगरा। राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के तहत विश्वविद्यालय में पार्किंग निर्माण और एसी खरीद में एक करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए। इसमें भी फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। मनमाने बिल लगाकर एक करोड़ रुपये के बजट को ठिकाने लगा दिया। एसटीएफ ने इस फर्जीवाड़े की जांच शुरू कर दी है। राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) से खंदारी परिसर में पार्किंग और सौंदर्यीकरण के लिए 60 लाख रुपये का बजट मिला। इसका निर्माण 29 जुलाई 2021 में शुरू हुआ। पांच दिन में 70 फीसदी कार्य दर्शाते हुए 42 लाख रुपये का भुगतान भी हो गया। अगले कुछ दिन बाद बाकी का 30 फीसदी कार्य और पूरा कर 18 लाख रुपये भी मिल गए। ऐसे ही इंस्टीट्यूट आॅफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, इंस्टीट्यूट आॅफ होम साइंस, इंस्टीट्यूट आॅफ सोशल साइंस, गणित और रसायन विज्ञान विभाग और सेमिनार में एसी लगाए। इनके लिए 40 लाख रुपये का बजट खर्च दिखाया। सभी में एसी नहीं लग पाए और मनमाने बिल भी लगा दिए।

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