Tuesday, June 18, 2024
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अब दोगुनी हो जाएंगी पुलिस की शक्तियां

गुंडा एक्ट, गैंगस्टर एक्ट में हो सकेगी सीधी कार्रवाई
निषेधाज्ञा, शांति भंग में सीधे जेल भेजने के अधिकार

आगरा। कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने से पुलिस की शक्तियां असीमित हो गई हैं। पुलिस अब गुंडा एक्ट, गैंगस्टर एक्टमें सीधी कार्रवाई कर सकेगी। शांति भंग में किसी का चालान करके उसे जेल भेज सकेगी। मुचलके भरने का अधिकार भी पुलिस को मिल गया है। पुलिस चाहेगी तो शांति भंग में जेल भेजा गया व्यक्ति भी कई दिनों तक जेल से बाहर नहीं आ सकेगा। निषेधाज्ञा जारी करने का अधिकार भी प्रशासन से हटकर पुलिस के पास आ गया है। नई व्यवस्था लागू होने से पुलिस की शक्तियां दोगुनी हो गईं हैं। पुलिस के पास अब प्रशासनिक अधिकारियों की शक्तियां होंगी। कानून व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति में पुलिस कमिश्नर अपने स्तर से निर्णय ले सकेंगे। पुलिस कमिश्नर धारा 144 लगा सकेंगे। कानून व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति में फायरिंग का आदेश लेने के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति नहीं लेनी होगी। शांति भंग के मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस कार्रवाई तय कर सकेगी। गुंडा एक्ट और गैंगस्टर एक्ट की फाइल को प्रशासनिक अधिकारियों के पास नहीं भेजनी पड़ेंगी। पुलिस कमिश्नर इस पर निर्णय लेंगे। नई व्यवस्था में आईपीएस, पीपीएस अधिकारी से लेकर इंस्पेक्टर, दरोगा, सिपाहियों की संख्या बढ़ जाएगी। थानों में पुलिस की कार्रवाई की निगरानी और सख्त हो सकेगी। पुलिसकर्मियों की कार्यशैली को बेहतर किया जा सकेगा। कानून व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति में भीड़ नियंत्रण के लिए बल प्रयोग में मजिस्ट्रेट की अनुमति नहीं लेनी होगी। अब तक गुंडा एक्ट और गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई के लिए पुलिस जिलाधिकारी के पास फाइल बनाकर भेजती है। इस पर कार्रवाई में समय लगता है, लेकिन अब पुलिस यह सीधे कर सकेगी।

नई व्यवस्था के तहत पुलिस के अधिकार
नई व्यवस्था लागू होनेसे पुलिस को कई अधिकार मिल जाएंगे। इनमें उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम 1970, विष अधिनियम 1919 के विधिक अधिकार, अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम 1956 के विधिक अधिकार, पुलिस (द्रोह-उद्दीपन) अधिनियम, 1922 के विधिक अधिकार, पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 के विधिक अधिकार, विस्फोटक अधिनियम 1884 के विधिक अधिकार, कारागार अधिनियम 1894 के विधिक अधिकार, सरकारी गोपनीयता अधिनियम 1923 के विधिक अधिकार, विदेशी अधिनियम 1946 के विधिक अधिकार, गैर कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम 1967 के विधिक अधिकार, भारतीय पुलिस अधिनियम 1861 के विधिक अधिकार, उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम 1944 के विधिक अधिकार, उत्तर प्रदेश अग्नि निवारण एवं अग्नि सुरक्षा अधिनियम 2005 के विधिक अधिकार, उत्तर प्रदेश गिरोहबंद और समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम 1986 के विधिक अधिकार शामिल हैं।

पुलिस चाहेगी तभी जमानत
धारा 151 की कार्रवाई में पुलिस के पास अब अधिक अधिकार होंगे। अभी तक पुलिस शांति भंग में गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करती है। मजिस्ट्रेट अपने स्तर से कार्रवाई कर अधिकतर मामलों में तत्काल जमानत दे देते हैं। लेकिन अब मजिस्ट्रेट के समक्ष अभियुक्त को पेश नहीं करना होगा। शांति भंग के मामलों में मामले की संवदेनशीलता को देखने के बाद आगे की कार्रवाई पुलिस कमिश्नर को दिए गए अधिकार के तहत तय होगी। इसी तरह धारा 107-116 के तहत भी पलिस के पास अधिकार होंगे। अभी तक पाबंद किए गए लोग यदि दूसरी घटना में शामिल होते थे तो कोई कार्रवाई नहीं होती थी। नई व्यवस्था में पुलिस पाबंद किए गए व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई के लिए अपने स्तर पर निर्णय ले सकेगी। इसके लिए जिलाधिकारी के अनुमोदन की जरूरत नहीं होगी।

सृजित होंगे नए पद
नई व्यवस्था में आईजी या उससे ऊपर रैंक का अधिकारी पुलिस कमिश्नर होगा। इसके अलावा एसएसपी या डीआईजी रैंक का अधिकारी अपर पुलिस कमिश्नर होगा। एसपी रैंक के तीन डिप्टी पुलिस कमिश्नर होंगे। अपर पुलिस अधीक्षक रैंक के तीन अधिकारी अपर डिप्टी पुलिस कमिश्नर कहलाएंगे। पुलिस उपाधीक्षक (क्षेत्राधिकारी) स्तर के 22 असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर होंगे।

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