Monday, June 24, 2024
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27 अस्पतालों के विरुद्ध जनहित याचिका स्वीकार

मानकों के खिलाफ चल रहे एक हजार निजी अस्पताल
मुख्य चिकित्सा अधिकारी से मिलीभगत होने का आरोप

आगरा। चिकित्सा, अग्निशमन व अन्य मानकों को ताक पर रखकर संचालित हो रहे 27 निजी अस्पतालों के विरुद्ध उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई है। न्यायालय ने याचिका को स्वीकार कर लिया है। डीएम, सीएमओ व अस्पताल संचालकों सहित नौ पक्षकारों को नोटिस जारी किए गए हैं। उन्हें 24 जनवरी अपना जवाब दाखिल करना है।
सपोर्ट इंडिया के अध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेश चंद सोनी, महासचिव ब्रजेश चाहर ने जनहित याचिका के बारे में बताया। याचिका में कहा गया है कि जिले में 27 नामजद और 1000 से अधिक निजी अस्पताल मानकों को ताक पर रख संचालित हो रहे हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी की मिलीभगत है। निजी अस्पतालों में अग्निशमन से लेकर जल एवं वायु प्रदूषण, बायो मेडिकल वेस्ट, आगरा विकास प्राधिकरण की अनापत्तियां नहीं ली गई हैं। बिना अनापत्ति व सत्यापन के बड़े पैमाने पर आवासीय भवनों में हॉस्पिटल संचालित हैं। जिनमें आग लगने पर बचाव से लेकर मरीजों के उपचार के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। प्रयागराज उच्च न्यायालय में जनहित याचिका की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल एवं जेजे मुनीर की पीठ ने की। 23 नवंबर को जारी आदेश में उच्च न्यायालय ने मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य, प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा, एनएमसी, स्वास्थ्य महानिदेशक, जिलाधिकारी आगरा, सीएमओ आगरा, एडीए उपाध्यक्ष, एसएसपी को नोटिस जारी किया है। 24 जनवरी 2023 तक पक्षकारों को नोटिस का जवाब अदालत में प्रस्तुत करना है। वहीं, इस संबंध में सीएमओ अरुण श्रीवास्तव का कहना है कि न्यायालय के आदेश का अनुपालन कराया जाएगा। 24 जनवरी तक नोटिस का जवाब प्रस्तुत किया जाएगा।

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