Tuesday, June 18, 2024
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निजी लैबों में डेंगू की मनमानी टेस्टिंग पर लगाया गया अंकुश

विभाग द्वारा संदिग्ध मरीजों की एलाइजा जांच कराने से रुकी गड़बड़ी

आगरा। स्वास्थ्य विभाग की सतर्कता से डेंगू के नाम पर निजी लैबों की मनमानी पर ब्रेक लगा है। जिन लैबों में डेंगू के संदिग्ध मरीज पाए जा रहे हैं, उनका मरीजों का विभाग एलाइजा टेस्ट करा रहा है। विभाग के इस कदम से रैपिड टेस्ट में मरीजों को डेंगू बताकर निजी हॉस्पिटलों में होने वाला शोषण रुका है।
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. नीरज कुमार के अनुसार जनपद में इस सीजन में अब तक डेंगू के 32 मरीज मिले। सभी मरीज स्वस्थ हैं। अभी कोई एक्टिव केस नहीं। डेंगू सोर्स रिडक्शन और लोगों को अवेयर करने का काम जारी है।
बता दें कि पिछले वर्ष डेंगू को लेकर बेकाबू हुए हालातों को देखकर इस बार स्वास्थ्य विभाग चौकन्ना रहा। निजी लैबों में कोई मरीज डेंगू पॉजिटिव मरीज निकला है तो उसका पूरा रिकॉर्ड विभाग तक पहुंचा। नवम्बर में रैपिड टेस्ट के नाम पर कुछ लैबों में मनमानी करने की कोशिश की गई तो स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता दिखाते हुए सभी मरीजों के रिकॉर्ड तलब कर उनके एलाइजा टेस्ट कराने शुरू कर दिए। निजी लैबों में रैपिड टेस्ट में डेंगू के 30 संदिग्ध मरीजों की विभाग ने एलाइजा जांच कराई तो उनमें सिर्फ 3 मरीज डेंगू पॉजिटिव निकले। इसके बाद डेंगू के रैपिड टेस्ट में निजी लैबों ने सावधानी बरतना शुरू कर दिया। संदिग्ध और पॉजिटिव आए डेंगू मरीजों की जांच के बाद निजी लैबों को पूरा डाटा तैयार करना पड़ता है। मरीज के नाम, पता, मोबाइल नम्बर और अतिरिक्त सेम्पल लेकर रखना पड़ता है। टेस्टिंग रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को भेजनी होती है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला अस्पताल और एसएन मेडिकल कॉलेज में इन मरीजों का एलाइजा टेस्ट कराता है। यहां की रिपोर्ट ही डेंगू होने या न होने की आधार मानी जाती है। पिछली बार निजी लैबों की टेस्टिंग में आ रहे डेंगू मरीजों पर विभाग का नियंत्रण नहीं था, इसलिए मरीजों से निजी अस्पताल और लैबों में जमकर ठगी हुई। जिला मलेरिया अधिकारी के अनुसार पिछले 9 महीने से डेंगू कंट्रोल करने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। बारिश के मौसम में स्वास्थ्य टीमों ने डेंगू की स्क्रीनिंग के लिए भ्रमण किया। एंटी लार्वा का छिड़काव, बारिश के बाद जलभराव न होने देने के लिए भी टीमें सक्रिय रहीं। जो अस्पताल मरीजों को डेंगू पॉजिटिव बताकर अपने यहां भर्ती कर लेते थे, उनकी जांच की गई और उनके घर तथा आसपास के इलाके में सोर्स रिडेक्टशन की एक्टिविटी कराई गई। लखनऊ स्तर से बड़ अधिकारियों ने रियलिटी चेक कराई तो अस्पतालों में डेंगू मरीजों की पड़ताल की गई। लोगों की जागरूकता और विभाग की सतर्ककता इस बार डेंगू अब तक कंट्रोल रहा है।

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