Tuesday, June 18, 2024
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करीब ढाई लाख लोग जन्म, मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए परेशान होंगे

जनता को भुगतना होगा निगम की लापरवाही का खामियाजा
वर्ष 2016 से पहले का डाटा गायब, सत्यापन नहीं हो सकेगा
आगरा। नगर निगम के पास करीब ढाई लाख लोगों के जन्म-मृत्यु का रिकॉर्ड नहीं हैं, जिससे आॅनलाइन सत्यापन नहीं हो रहा है। अब इन लोगों के जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र दोबारा बनवाने होंगे। निगम की गलती से लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। अगर आपके बच्चे का जन्म वर्ष 2016 से पहले हुआ है और आपने वर्ष 2011 से 2016 तक के बीच का जन्म प्रमाणपत्र बनवा लिया है लेकिन आपको दोबारा जन्म प्रमाणपत्र बनवाना होगा। क्योंकि नगर निगम की वेबसाइट से आप जन्म प्रमाणपत्र का सत्यापन नहीं कर पाएंगे और न ही दोबारा उसे डाउनलोड कर सकेंगे। वर्ष 2011 से 2016 तक पांच साल का जन्म-मृत्यु का रिकॉर्ड नगर निगम के पास है ही नहीं। जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों के सत्यापन का रिकॉर्ड भी निगम के पास नहीं है। नगर निगम की जगह राज्य और केंद्र सरकार की वेबसाइट पर डेटा शिफ्टिंग के दौरान दिक्कत हुई। अब पांच साल में बने ढाई लाख से ज्यादा जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र साइट पर उपलब्ध नहीं हैं। इन लोगों के सामने फिर से प्रमाणपत्र बनवाने की परेशानी है। बता दें कि ताजनगरी के अस्पतालों में पैदा होने वाले बच्चों का रिकॉर्ड अस्पताल प्रबंधन की ओर से वेबसाइट पर अपलोड किया जाता है। डाटा अपलोड होने के एक माह बाद जन्म प्रमाणपत्र आॅनलाइन डाउनलोड हो जाता है। यह पूरा डेटा वेबसाइट से पहले उत्तर प्रदेश सरकार के जन्म और मृत्यु पंजीकरण साइट पर और उसके बाद भारत सरकार की वेबसाइट पर जाता है। घरों पर जन्म लेने वाले बच्चों का प्रमाणपत्र निगम के सेनेटरी इंस्पेक्टर मौके पर जाकर सत्यापन के बाद बनाते हैं। नगर स्वास्थ्य अधिकारी के डॉ. अतुल भारती के अनुसार निगम के पास पांच वर्षों का रिकॉर्ड नहीं है। इस अवधि के प्रमाणपत्रों का सत्यापन नहीं हो सकता। इनको डाउनलोड भी नहीं कर पाएंगे। लोग दोबारा आवेदन कर रहे हैं तो हम मैनुअल रिकॉर्ड से देखकर दोबारा बना रहे हैं।

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