Tuesday, June 18, 2024
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संसाधन विहीन निगम कैसे संभाले स्वच्छ आगरा की जिम्मेदारी…?

सफाई उपकरणों की भारी कमी, जो हैं वह भी टूटे-फूटे
शहर में प्रतिदिन निकलता है 800 मीट्रिक टन तक कचरा
तीन दशकों में आबादी दोगुनी, सफाईकर्मी रह गए आधे

आगरा। नगर निगम संसाधनों के संकट से बुरी तरह जूझ रहा है। खासकर सफाई व्यवस्था का मामला हो तो कर्मचारियों के पास सफाई उपकरण ही नहीं है। वे टूटे-फूटे हथठेलों और गैंती-फांवड़े के भरोसे कब तक सफाई व्यवस्था संभालेंगे। वे भी तब, जबकि पिछले तीन दशक में शहर की आभादी दोगुना बढ़ गई है और सफाई कर्मचारियों की संख्या आधी ही रह गई है। नगर निगम को पैसे तो खूब मिलता है, लेकिन जरूरी कार्यों में इसे खर्च करने के बजाय दूसरे कामों में खर्च कर दिया जाता है। बेसिक संसाधन हैं नहीं और नित-नई बड़ी-बड़ी गाड़ियां खरीदकर एमएनटी वर्कशॉप में खड़ी कर दी जाती हैं। कई गाड़ियां तो बिना उपयोग के यहां खड़े-खड़े ही कंडम हो गई हैं। सफाई व्यवस्था में 1713 स्थाई कर्मचारी लगे हैं। इसके अलावा 584 कर्मचारी संविधा पर रखे गए थे। इसके अलावा ठेके पर सफाई श्रमिक कार्य करते हैं। लेकिन इनके पास संसाधनों का आभाव है। सफाई कर्मचारियों की पीढ़ा है कि उनसे सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने की उम्मीद तो की जाती है, लेकिन उनके पास संसाधन ही नहीं है। सफाईकर्मी रमेश ने बताया कि उनके पास हथठेले भी टूटे-फूटे हैं। कूड़ा एकत्रित करने के लिए पहले उन्हें हथठेलों में लकड़ी या प्लास्टिक का पटरा लगाकर ठीक करना पड़ता है, उसके बाद वे कूड़ा उठा पाते हैं। बेलनगंज में काम पर आए एक अन्य कर्मचारी ने अपनी पीढ़ा व्यक्त की। उनका कहना था कि अधिकारी उनसे तो सवाल-जवाब कर लेते हैं, लेकिन संसाधनों की मांग पूरी नहीं की जाती।
बता दें कि शहर में 800 मीट्रिक टन से अधिक कचरा प्रतिदिन निकलता है। यह इतना अधिक है कि पूरी तरह से कभी भी शहर साफ नहीं हो पाता। यही वजह है कि जगह-जगह कचरे के ढेर पड़े देखे जा सकते हैं।

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