Thursday, June 13, 2024
HomeUttar PradeshAgraनशा मुक्ति केंद्र को बना रखा था ‘यातना गृह’

नशा मुक्ति केंद्र को बना रखा था ‘यातना गृह’

युवक की मौत के बाद सामने आया अंदर का सच
भर्ती के बाद व्यक्ति ने नहीं मिल पाते थे परिजन भी
चार दीवारी के अंदर मारपीट से गूंजती रहती थीं चीखें

आगरा। नशा मुक्ति केंद्र को ‘यातना गृह’ बना रखा था। नशे के आदी लोगों के साथ यहां बहुत बुरा बर्ताव होता था। उन्हें पीटा जाता था। उनकी चीखें चार दीवारी के अंदर गूंज कर रह जाती थी। यहां भर्ती एक युवक की मौत के बाद मुक्ति केंद्र का सच सामने आया है। मलपुरा में इटौरा स्थित संकट मोचन वृद्ध आश्रम एवं नशा मुक्ति केंद्र में शुक्रवार को फिरोजाबाद के प्रशांत कुमार (32) की मौत हो गई। इसका पता चलने पर संचालक और कर्मचारी भाग निकले। केंद्र में भर्ती अन्य युवकों के हंगामे पर पुलिस पहुंची। परिजन भी पहुंच गए। उन्होंने पिटाई से बेटे की मौत का आरोप लगाया। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। विसरा सुरक्षित किया गया है। फिरोजाबाद के थाना जसराना स्थित गांव लोदपुरा निवासी गया प्रसाद किसान हैं। पत्नी रतनश्री सरकारी विद्यालय में शिक्षिका हैं। गया प्रसाद ने बताया कि बेटे प्रशांत को सिगरेट की लत थी। वो इसे छुड़ाना चाहते थे। आगरा के एक परिचित ने संकट मोचन वृद्ध आश्रम एवं नशा मुक्ति केंद्र के बारे में बताया। इस पर 16 जनवरी को प्रशांत को लेकर आए। संचालक उदित चौहान ने हर महीने 10 हजार का खर्च बताया। कहा कि दवाओं की मदद से नशा छुड़ाते हैं। इस पर बेटे को भर्ती करा दिया। उनसे हर माह रुपये ले लिए जाते थे। मगर, बेटे से मिलने नहीं दिया जाता था। वह पत्नी और छोटे बेटे रूपपाल के साथ 19 मई को आए थे। तब केंद्र के कर्मचारियों ने सामान तो ले लिया मगर बेटे से मुलाकात नहीं कराई। रोजाना व्यायाम और खाना खिलाने के वीडियो भेज देते थे। शुक्रवार सुबह नौ बजे थाना जसराना का सिपाही घर आया। बताया कि बेटे की तबीयत खराब है। इस पर वो केंद्र पर आए। बेटे का शव बेसमेंट में पड़ा था। संचालक और कर्मचारी केंद्र पर बाहर से ताला लगाकर फरार थे। केंद्र में 16 और मरीज थे। वह शोर मचाने लगे। इस पर पड़ोस के लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने पहुंचकर सभी को मुक्त कराया।

कैद में रखते थे नशे के लती को
मृत युवक के पिता ने आरोप लगाया कि केंद्र में बेटे को कैद करके रखा गया था। रात में आठ बजे बेटे का खाना खाते हुए वीडियो भेजा गया था। इसमें वो ठीक नजर आ रहा था। केंद्र में भर्ती कुछ युवकों ने बताया कि प्रशांत के साथ गुरुवार दोपहर को कर्मचारियों ने मारपीट की थी। इसके बाद रात में भी पिटाई लगाई थी। इससे उसकी हालत बिगड़ गई। इसके बावजूद उसे अस्पताल नहीं ले गए। इससे बेटे की जान चली गई। पुलिस ने पोस्टमार्टम कराया, लेकिन तहरीर देने पर भी संचालक और कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।

पहले भी हो चुकी हैं घटनाएं
नशा मुक्ति केंद्र में किसी की मौत का यह पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व भी कालिंदी विहार, सिकंदरा क्षेत्र में अवैध तरीके से संचालित नशा मुक्ति केंद्र में मौत हो चुकी हैं। बिना पंजीकरण के एक कमरे में केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। मानकों का भी ख्याल नहीं रखा जाता है। स्वास्थ्य विभाग भी कार्रवाई नहीं करता है। इसम मामले में सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव का कहना है कि नशा मुक्ति केंद्र में विशेषज्ञ चिकित्सक होना जरूरी होता है। प्रथम दृष्टतया इस नाम से नशा मुक्ति केंद्र पंजीकृत नहीं है। वे इसकी जांच करवा रहे हैं।

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