Saturday, June 22, 2024
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कहां हैं पिछले वर्षों में रोपे गए डेढ़ करोड़ पौधे?

हर साल हरियाली बढ़ाने के लिए चलता है सघन अभियान
करोड़ों रुपया होता खर्च, लेकिन हरियाली होती जा रही कम

आगरा। आज विश्व पर्यावरण दिवस है। हरियाली को लेकर चिंता व्यक्त करने के लिए कार्यक्रम होंगे। कई जगह पौधारोपण कार्यक्रम भी आज हो रहे हैं। एक दिन के लिए सही पर आज हर कोई पर्यावरण की चिंता करता हुआ नजर आएगा। मगर अहम सवाल यह है कि पिछले वर्षों में रोपी गई हरियाली आखिर कहां गई? आंकड़ों के एक अनुमान के मुताबिक डेढ़ करोड़ पौधे रोपे गए, लेकिन यह कहां हैं, किसी को नहीं पता। हर साल विश्व पर्यावरण दिवस पर पौधारोपण अभियान चलता है। मानसून सक्रिय होने से पहले विभिन्न विभागों को सघन पौधारोपण के लिए टास्क दिया जाता है। आंकड़ेबाजी रिकोर्ड में दर्ज हो जाती है। दावा किया जाता है कि इतने पौधे रोपे गए, लेकिन वास्तविकता इससे इतर है। पौधों का पता ही नहीं है कि इन्हें कहां रोपा गया। आगरा में एक भी घना जंगल नहीं रहा है। सिर्फ 6.50 प्रतिशत हरित क्षेत्र है, जबकि मानकों के अनुसार यह 33 प्रतिशत होना चाहिए। यानि शहर सीमेंट और कंकरीट का जंगल बनता जा रहा है। तमाम दावों के बावजूद न तो शहर की हरियाली बढ़ी न हरियाली का क्षेत्र में कोई विस्तार हुआ। पिछले पांच-छह सालों में डेढ़ करोड़ से ज्यादा पौधों को लगाया जा चुका है। बावजूद इसके शहर का हरित क्षेत्र कुल क्षेत्रफल का मात्र 6.50 प्रतिशत है। यह तय मानक से काफी कम है। ताज ट्रिपेजियम जोन में होने के कारण शहर में पेड़ों को काटना आसान नहीं है फिर भी शहर के विकास की कीमत हरे-भरे पेड़ों की बलि देकर चुकानी पड़ती है। वन विभाग के सूत्र बताते हैं कि वर्ष 2015 में वन क्षेत्र 6.78 प्रतिशत था जो साल 2017 में घटकर 6.73 प्रतिशत रह गया। इसके बाद साल 2019 में यह और घटा और सिर्फ 6.50 प्रतिशत रह गया। 2021 में वन क्षेत्र न तो घटा और न ही बढ़ा और यह 6.50 प्रतिशत पर स्थिर रहा। इन्हीं आंकड़ों को लेकर सवाल उठता है कि पौधे कहां रोप दिए गए?

ढाई लाख प्रतिबंधित
वाहन उड़ा रहे धूंआ

स्क्रेप सेंटर शुरू होने के बाद मिल सकेगी राहत

कबाड़ घोषित की जा चुकी ढाई लाख प्रतिबंधित गाड़ियां सड़कों पर दौड़ रही हैं। उनसे गहरा काला धूंआ निकलकर हवा में जहर घोल रहा है। इस मामले में अभी तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। वाहन प्रदूषण रोकने के लिए जनवरी 2019 से अप्रैल 2023 के बीच 54 सीरीज के ढाई लाख से ज्यादा चार पहिया, दोपहिया और तीन पहिया वाहनों के पंजीयन निरस्त कर दिए गए थे। परिवहन विभाग से एक लाख से ज्यादा वाहन मालिकों ने दूसरे जिलों में वाहन ट्रांसफर करा लिए। इसके बावजूद चलन से बाहर हुए ये वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। बता दें कि ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) में 15 साल पुराने पेट्रोल वाहन और 10 साल पुराने डीजल चालित वाहनों का संचालन प्रतिबंधित है। 1989 से लेकर 2004 तक के वाहन प्रतिबंधित हैं। इनमें व्यवसायिक और निजी 54 सीरीज की गाड़ियां शामिल हैं। दूसरी जगह पंजीकरण कराने के बाद भी प्रतिबंधित वाहन यहां संचालित हो रहे हैं। स्मार्ट सिटी के कैमरों में ऐसे वाहन अकसर कैद होते हैं। इनके चालान भी नहीं हो पाते। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) अनिल कुमार सिंह का कहना है कि थानों में 15 साल पुरानी गाड़ियों को खड़ी करने की जगह नहीं है। ऐसे में पुलिस भी इन गाड़ियों को कम ही पकड़ती है। एआरटीओ का कहना है कि आगरा में स्क्रैप सेंटर 15 जून तक शुरू हो जाएगा। इसके बाद पुराने वाहनों को पकड़कर सीधे स्क्रैप सेंटर भेजा जाएगा। इससे पुराने वाहनों के संचालन पर रोक लग सकेगी।

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