Sunday, June 23, 2024
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जमीन वापसी के लिए १४ साल से लड़ रहे हैं किसान, ताजमहल का घेराव, ६ बार कर चुके हैं अनशन

किसानों की जमीन के लिए प्रशासन ने ११ सदस्सीय कमेटी बनाई थी। जिसकी रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है। किसान इस रिपोर्ट को प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में रखने की बात कह रहे हैं, जबकि कमेटी इसे शासन को भेजने की बात कह रही है। इस बात को लेकर किसान और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच कोई सहमति नहीं बन पा रही है।

आगरा। ताजनगरी फेज थ्री के लिए अधिग्रहित की गई भूमि को लेकर किसान आरपार की लड़ाई लड़ रहे हैं। पिछले १४ साल से किसानों ने अनवरत धरना प्रदर्शन किए हैं। ताजमहल के घेराव के साथ-साथ किसानों ने २८ दिन तक अनशन किया है। इसके बावजूद भी इस मसले का कोई हल दिखाई नहीं दे रहा है। पिछले तीन दिनों से एक बार फिर से किसान अनशन पर बैठ गए हैं। मंगलवार को कलक्ट्रेट से हटाकर उन्हें सदर तहसील पर बैठा दिया गया। अनशन का नेतृत्व कर रहे किसान श्याम सिंह चाहर का कहना है कि जमीन हमारी है। हमें मिलनी चाहिए।

मामला २००९ का है। इनर रिंग रोड, लैंड पार्सल और ताजनगरी फेज थ्री के लिए प्रशासन ने ९३८.८९ हेक्टअर भूमि अधिग्रहण की थी। ये जमीन छलेसर से रोहता, जखौदा गांव तक ली गई थी। इसी भूमि में ताजनगरी फेज थ्री के लिए ४२ हेक्टेअर भूमि ली गई। जिसमें ५ गांव देवरी, पचगाई, रोहता, इटौरा और जखौदा के किसानों की भूमि शामिल है। अनशन पर बैठे किसान श्याम सिंह चाहर का कहना है कि ४२ हेक्टेअर भूमि प्रशासन ने एडीए की ताजनगरी फेज थ्री और सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहित की थी, लेकिन जब योजना ही फेल हो गई तो उन्हें उनकी जमीन वापस की जाए। उन्होंने बताया कि वर्ष २०१९ में प्राधिकरण की योजना ताजनगरी फेज थ्री पर विराम लग गया और सड़क बनाने का एलाइमेंट भी बदल गया। अब नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) सड़क बनाने का काम कर रही है। जो जमीन प्राधिकरण ने अधिग्रहित की थी। उसे उन्हें वापस दिया जाए। इस संबंध मेंं मंडलायुक्त अमित गुप्ता, एडीए उपाध्यक्ष चर्चित गौड़ से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन किसी से संपर्क नहीं हो सका।

ना मुआवजा मिला, ना ही जमीन
भूमि अधिग्रहण २००९ के बाद से किसानों का प्रदर्शन जारी है। गांव जखौदा के अभय ने बताया कि उनके पास सवा बीघा जमीन थी जो कि प्रशासन ने अधिग्रहित कर ली है। उसका ना तो सरकार मुआवजा दे रही है और ना ही जमीन को लौटा रही है। विकास खंड बरौली अहीर रोहता गांव के चंद्रशेखर शर्मा का कहना है कि उनकी ७ बीघा जमीन अधिग्रहित की जा चुकी है। इसके लिए प्रशासनिक अधिकारियों ने कोई सहमति नहीं ली थी। पुलिस के बल पर उनकी जमीन को ले लिया गया। अपनी जमीन वापसी की मांग को लेकर अब तक दर्जनों बार अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट चुके हैं।

६ बार अनशन, दर्जनों धरना प्रदर्शन
किसान नेता श्याम सिंह चाहर का कहना है कि भूमि अधिग्रहण के मुआवजे में भी प्रशासनिक अधिकारियों ने दोयम दर्जा अपनाया है। जिन किसानों के साथ करार हुआ है उन्हें प्रशासन ने ६४८ रुपये प्रतिवर्ग मीटर दिया गया है, जबकि उसी जमीन पर सरकारी अधिकारियों के सगे सम्बंधियों और चहेतों को १९०२ रुपये के हिसाब से मुआवजा दिया गया है। उन्होंने इसमें में तगड़ा घोटाला बताकर जांच की मांग की है। किसान श्याम सिंह चाहर ७ किसानों के साथ सदर तहसील में अनशन पर बैठे हैं। उनके साथ धरने में शामिल होने वाले सभी छह लोग करीब ६० साल की उम्र के हैं। उन्होंने इस लड़ाई को आरपार तक ले जाने की चेतावनी दी है। बुधवार को अनशन पर किसानों का तीसरा दिन है। इस पूर्व वह ५ बार अनशन कर चुके हैं।

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