Tuesday, June 18, 2024
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१२ दिन से अनशन पर बैठे किसानों को वापस मिल सकती है जमीन, अफसरों का आश्वासन

अनशन पर बैठे किसान नेता श्याम सिंह चाहर का कहना है कि मर जाएंगे लेकिन पीछे नहीं हटेंगे। वे 14 वर्षों से जमीन वापसी की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाए हैं कि लैंड पार्सल में प्रशासनिक और प्राधिकरण के अधिकारियों ने बड़ा घोटाला किया है। अगर सही जांच की जाए तो कई बड़े अफसर इस मामले में फंस जाएंगे।

आगरा। जमीन वापसी की मांग के लिए 12 दिन से अनशन पर बैठे किसानों के सब्र का बांध टूट रहा है। किसानों ने शुक्रवार को ताजमहल पर जाकर प्रदर्शन करने और आत्मदाह की चेनावनी दी थी। इसके बाद प्रशासन हरकत में आ गया। दोपहर को प्रशासनिक और एडीए के अधिकारियों ने किसानों के साथ करीब डेढ़ घंटे वार्ता की और किसानों को समझा-बुझाकर शांत किया है। किसान नेता श्याम सिंह चाहर का कहना है कि एडीएम सिटी ने उन्हें आश्वस्त किया है कि नियमानुसार उनकी मांगे मानी जाएंगी।

लैंड पार्सल, ताजनगरी फेस थ्री और इनर रिंग रोड के लिए आगरा विकास प्राधिकरण ने छलेसर से रोहता गांव तक 938.89 हेक्टेअर भूमि अधिग्रहित की थी। जिसमें 5 गांव देवरी, पचगाई, रोहता, इटौरा और जखौदा की 42 हेक्टेअर भूमि को ताजनगरी फेस थ्री के लिए अधिग्रहित किया था। मगर योजना फेल हो गई और सड़क बनाने का एलाइमेंट भी चेंज हो गया। इस पर किसानों ने अपनी 42 हेक्टेअर भूमि को वापस मांगा है, लेकिन 14 साल से उन्हें ना तो जमीन मिली है और ना ही भूमि वापस मिली है। हालांकि वे आज भी उस भूमि पर खेती कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि अब वे अपनी जमीन वापस मांग रहे हैं। उन्हें मुआवजा नहीं चाहिए। इस बात को लेकर एडीए और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ किसानों की कई बार बैठकें हो चुकी है, लेकिन कोई हल नहीं निकल पाया है।

पांच जून से अनशन पर बैठे हैं किसान
अनशन पर बैठे किसान नेता श्याम सिंह चाहर ने बताया कि उनके साथ चार और किसान अनशन बैठे हैं। जिनमें रघुनाथ, वेदों पंडित, भगवान सिंह और श्रीभगवान शामिल हैं। अनशन पर बैठे किसानों की हालात खराब है। श्याम सिंह के पेट में दर्द की समस्या पैदा हो गई है। श्याम सिंह ने बताया कि उन्होंने ताजमहल पर जाकर आत्मदाह करने की चेतावनी दी थी। इसके बाद एडीएम सिटी अनूप कुमार उनके अनशन स्थल (सदर तहसील) पर दोपहर 12 बजे से पहले ही पहुंच गए थे। उनके साथ प्राधिकरण के संयुक्त सचिव सोमकमल सीताराम भी शामिल थे। अफसरों ने उन्हें आश्वस्त किया है कि नियमानुसार उनकी मांगे मानी जाएंगी।

फंसेगा पेच
४२ हेक्टेअर भूमि की वापसी की मांग करने वाले किसानों की मांगों के आगे पेच फंस सकता है। अगर शासन ने जमीन वापसी की मांग पर मुहर लगाई तो सबसे बड़ी समस्या यह रहेगी कि जिन किसानों को अधिग्रहित भूमि के एवज में मुआवजा दिया जा चुका है उनके वापस कैसे ले पाएंगे। इस संबंध में एडीए सचिव गरिमा सिंह का कहना है कि जमीन वापसी के लिए कोई नियम नहीं है। उन्होंने ११ सदस्यीय रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत की है। शासन की ओर से जब कोई जवाब मिलेगा तभी इस बारे में कोई निर्णय लिया जा सकेगा। इस संबंध में जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका है। एडीएम सिटी अनुप कुमार का मोबाइल नंबर आउट ऑफ रीच बता रहा था।

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