Sunday, June 23, 2024
HomeUncategorizedयमुना नदी पर बना आंबेडकर पुल खतरे की जद में कभी भी...

यमुना नदी पर बना आंबेडकर पुल खतरे की जद में कभी भी हो सकती है कोई र्दुघटना

वर्ष २००८ में बीएसपी शासनकाल में बने आंबेडकर पुल पर कार्यदायी संस्था सेतु निगम ने चिंता जाहिर की है। नगर निगम द्वारा बनाई गई बेरिकेडिंग पुल के लिए मुसीबत बन सकती है। इसके साथ ही पुल पर भारी वाहनों के लोड से एप्रोच भी बिगड़ गई है।

आगरा। बीएसपी शासनकाल में बना आंबेडकर पुल पर खतरा बढ़ रहा है। इसकी आशंका जाहिर करते हुए कार्यदायी संस्था ने चेतावनी जारी की है। सेतू निगम ने पुल पर नगर निगम द्वारा बनाई गई ४ मीटर ऊंची जालीदार बेरिकेडिंग से पुल पर खतरा जताया है। इस संबंध मेंं पीडब्ल्यूडी और सेतू निगम ने मंडलायुक्त को पत्र लिखकर कोई भी र्दुघटना होने की आशंका जताई है।

ताजमहल से एत्माद्वौला, चीनी का रोजा, मेहताब बाग को जाने वाले पर्यटकों के लिहाज से आंबेडकर पुल का निर्माण कराया गया था। बीएसपी के शासनकाल में नौ अक्टूबर २००८ में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने पुल का शिलान्यास किया। २०१० में पुल को आम लोगों के लिए खोल दिया गया। इस पुल को बनाने में करीब २५०८ लाख की अनुमानित राशि खर्च हुई थी। पुल पर प्रतिदिन के हिसाब से करीब १५ हजार से अधिक वाहर प्रतिदिन आवागमन करते हैं। आंबेडकर पुल कई बार क्षतिग्रस्त हो चुका है। आप पार्टी के नेता कपिल वाजपेई का कहना है कि सरकारी विभागों ने पत्र लिखकर एक अपनी खानापूर्ति कर ली है। अगर कोई जनहानि होती है तो जनता को झेलनी पड़ेगी। जिम्मेदार विभागों ने अपने-अपने पल्ले झाड़ लिए हैं।

बिना एनओसी के बना दी बेरिकेडिंग
कार्यदायी संस्था सेतु निगम ने पुल के निर्माण पुल पर एक मीटर की ऊंचाई वाली एक जाली लगाई थी, लेकिन इसके बाद नगर निगम ने पीडब्ल्यूडी और सेतु निगम से बिना एनओसी लिए ही पुल पर ४ मीटर की ऊंचाई वाली लोहे की जालीदार बेरीकेडिंग लगा दी है। जो कि ५ जून का टूटकर गिर गई। इससे घटना के बाद कार्यदायी संस्था ने अलर्ट जारी करते हुए किसी भी र्दुघटना की आशंका जताई है।

१८ बार हो चुका है क्षतिग्रस्त
हाथीघाट और स्मारक एत्माद्वौला को जोडऩे के लिए स्ट्रेची ब्रिज के बराबर में आंबेडकर पुल का निर्माण कराया गया था। ६५० मीटर लंबे आंबेडकर पुल में २२ एस्पेंशन ज्वाइंट हैं। ब्रिज के निर्माण के बाद से ही भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। ब्रिज पर लगा आरसीसी लिंटर उखड़ गया। दो एक्पेंशन ज्वाइंट क्षतिग्रस्त हो गए। अब तक आंबेडकर पुल १८ बार क्षतिग्रस्त हो चुका है। पिछली बार जी २० सम्मेलन के दौरान इस पर मरम्मत कार्य कराया गया था।

सीमेंट ढुलाई ने बिगाड़ दी एप्रोच
जाम की समस्या और हल्के वाहनों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए आंबेडकर ब्रिज वैकल्पिक मार्ग के तौर पर कामयाब रहा है। लेकिन यमुना ब्रिज स्थित रेलवे गोदाम से इस पुल पर होकर हर दिन एक से डेढ़ हजार टन से अधिक सीमेंट की ढुलाई हो रही है। पुल पर ट्रैक्टर व अन्य भारी वाहनों के दवाब से एप्रोच बिगड़ गई है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments