Sunday, June 23, 2024
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8 महीने से अपनी ‘यशोदाÓ मां से मिलने के लिए छटपटा रही है कायनात, आठ साल तक की थी परवरिश

मीना का कहना है कि मैनें उसे आठ साल तक अपने सीने से लगाकर रखा है। उसे अपनी बेटी माना है। उसे अच्छी शिक्षा मिले इसलिए कान्वेंट स्कूल में उसका दाखिला कराया है। मेरी बच्ची आठ महीन से मुझसे दूर है। हम दोनों एक दूसरे से मिलने के लिए बेकरार हैं। वो राजकीय बाल गृह में दिन रात रोती है और मैं यहां।

आगरा। ये कहानी एक ऐसी बच्ची की है जो कि नवजात हालत एक किन्नर को लावारिश पड़ी मिली थी। किन्नर ने उसे एक महिला को ये कहते हुए दे दिया कि अगर पाल सको तो पाल लेना, नहीं तो फेंक देना, लेकिन एक मां को दिल बच्ची पर पसीज गया और उसने उसे बेहतर परवरिश दी, लेकिन जब बच्ची बड़ी हो गई तो एक दिन किन्नर फिर उस मोहल्ले में आया और बच्ची को अपने साथ ले गया। जैसेे-तैसे उस किन्नर से मां ने कायनात को वापस लिया था, लेकिन सरकारी पेच से फिर से उसे अपनी बच्ची से दूर कर दिया है। अब पिछले ८ महीने से बच्ची और मां एक दूसरे के पास जाने के लिए छटपटा रहे हैं। अपनी बच्ची को पाने के लिए बेबस मां से केबिनेट मंत्री से लेकर जिलाधिकारी तक फरियाद लगाई है।

मामला वर्ष २०१४ का है। नंदलाल पुर टेढ़ी बगिया की रहने वाली मीना देवी ने बताया कि २८ नवंबर को फर्रुखाबाद के रहने वाले अंजलि उर्फ अर्जुन किन्नर उसके घर एक नवजात बच्ची को लेकर पहुंचा था। किन्नर ने मीना से कहा था कि इसका पालन पोषण कर लेना नहीं तो इसे कहीं फेंक देना। मीना ने उस बच्ची की देखभाल की उसका इलाज कराया और उसे कायनात नाम दे दिया। मीना ने उसका एक अंग्रेजी मीडियम स्कूल में दाखिला करा दिया। कायनात अब ९ साल की हो गई है। उसे चाइल्ड वेलफेयर कमिटी (सीडब्ल्यूसी) ने राजकीय बाल गृह में निरुद्ध कर दिया है। पिछले ८ माह से वह आगरा के शाहगंज स्थित राजकीय बाल गृह में रह रही है। हाल ही में जब मीना कायनात को देखने के लिए पहुंची तो वह फफक-फफक पर रोने लगी। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है। मीना ने जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल से बच्ची की सुपुर्दगी की गुहार लगाई है।

किन्नर ले गया था कायनात को
मीना ने बताया कि अक्टूबर २०२१ में किन्नर अर्जुन उसके घर आया था और वह उसकी अनुपस्थिति में कायनात को अपने साथ फर्रुखाबाद ले गया। जब उसे पता चला तो वह फर्रुखाबाद पहुंच गई और चाइल्डलाइन के हस्तक्षेप के बाद वापस अपने साथ आगरा ले आयी। बाल कल्याण समिति ने उसे फिट पर्सन घोषित करते हुए कायनात को उसकी सुपुर्दगी में सौंप दिया और हर १५ दिन बाद बच्ची को लेकर रजिस्टर पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा था। तब से वह लगातर बच्ची को बाल कल्याण समिति के पास लेकर जाती थी।

8 महीने से व्याकुल है मीना
मीना ने बताया कि १७ अगस्त २०२२ को बाल कल्याण समिति ने उसे कायनात को साथ लेकर बुलाया और तब से वह राजकीय बाल गृह में रह रही है। उसे हर बार यह कहा जाता था कि बच्ची उसे सुपुर्द कर दी जाएगी, लेकिन उसे कायनात से दूर ही रखा गया है। इसके बाद से एक आदेश भेजा गया जिसमें उसकी सुपुर्दगी में रखने से इनकार कर दिया गया है। तब से लेकर आज तक मीना कायनात को पाने के लिए छटपटा रही है। चाइल्ड राइट एक्टिविस्ट नरेश पारस का कहना है कि एक वर्ष बाद बच्ची कानपुर बाल गृह में भेज दी जाएगी। इससे बाद बच्ची का मां से मिलने की संभावनाएं कम हो जाएंगी। बच्ची पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। समिति को इस मामले में पुन: विचार किया जाना चाहिए।

क्या कहती हैं समिति की अध्यक्ष
समिति की अध्यक्ष मोनिका सिंह का कहना है कि किन्नर ने आरोप लगाया था कि महिला बच्ची के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करती है। उसकी आपत्ति के बाद बच्ची को बाल गृह में रखवाया था। मगर जांच में पाया गया कि बच्ची और मां के बीच अच्छे संबंध हैं। वे जनवरी से छुट्टी पर थीं। इस दौरान समिति के सदस्यों ने मार्च 2023 में अंतिम रिपोर्ट में पर हस्ताक्षर किए थे कि बच्ची महिला को सुपुर्द नहीं की जाएगी। समिति के सदस्य बेताल सिंह का कहना है कि पूरा मामला अध्यक्ष मोनिका सिंह के संज्ञान में है।

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