Tuesday, June 18, 2024
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चंबल में ‘डॉल्फिन’ का कुनबा बढ़ा

20 किलोमीटर नदी में 80 डॉल्फिन होने का अनुमान
सैलानियों को यहां आकर हो सकता है सुखद अनुभव

आगरा। चंबल नदी में डॉल्फिन का कुमबा लगातार बढ़ रहा है। एक अनुमान के मुताबिक नदी में 80 से अधिक डॉल्फिन हो सकती हैं। यदि उचित व्यवस्थाएं हो जाएं तो सैलानियों को यहां आकर सुखद अनुभव हो सकता है। आगरा में ताजमहल देखने आने वाले पर्यटक और वन्यजीव प्रेमी चंबल सेंचुरी में डॉल्फिन की अटखेलियों के अदुभुत नजारे देख सकते हैं। इसके लिए प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। प्रस्ताव शासन को भेजा गया है कि नदी के 20 किलोमीटर के दायरे को डॉल्फिन सफारी घोषित कर दिया जाए। राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी प्रोजेक्ट की उप वन संरक्षक (वन्यजीव) आरुषि मिश्रा के अनुसार जल्दी ही प्रस्ताव पर मोहर लग सकती है। योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश को पर्यटन प्रदेश के रूप में विकसित करने के लिए प्रदेश में नई पर्यटन नीति लागू कर दी है। सरकार द्वारा पर्यटन उद्योग को नई गति प्रदान करने के लिए प्रदेश में ईको टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा रहा है। घड़ियाल, मगरमच्छ, कछुए, पक्षियों और प्राकृतिक सुंदरता से गुलजार चंबल सेंचुरी में अब जल्द ही डॉल्फिन सफारी क्षेत्र भी घोषित होगा। डॉल्फिन सफारी के लिए चंबल में इटावा के निकट स्थित सहसों क्षेत्र का चयन किया गया है। इसी जगह बड़ी संख्या में डॉल्फिन पाई जाती हैं। यहां पर डॉल्फिन की संख्या में लगातार इजाफा देखा जा रहा है। उप वन संरक्षक (वन्यजीव) आरुषि मिश्रा ने बताया कि साल 1979 में घोषित हुए राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य 635 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला है। ये मध्य प्रदेश, राजस्थान व उत्तर प्रदेश तीन राज्यों को जोड़ता है। इसमें साल 2008 से घड़ियालों की प्राकृतिक हैचिंग हो रही है। परिणाम स्वरूप 2,176 घड़ियाल की संख्या पहुंच गई है। 878 मगरमच्छ के साथ उत्तर प्रदेश के इटावा तक करीब छह हजार दुर्लभ प्रजाति के कछुए पाए जाते हैं। बीते दिनों वाराणसी और चंबल का प्रजेंटेशन भारत सरकार के सामने हो चुका है। चंबल की वास्तविक स्थिति देख सभी खुश थे। यह इको टूरिज्म और डॉल्फिन कंजर्वेशन की दिशा में भी सरकार का बड़ा कदम है।

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