Tuesday, June 18, 2024
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२३८ करोड़ के भ्रष्टाचार में घिरे आरोपी को मेयर ने बनाया ओएसडी, २००८ में मिलते थे ५ हजार

जिस कर्मचारी को २००८ में ५ हजार रुपये महीने मिलते थे। उसने नगर आयुक्त का पीए बनते ही इतनी रकम कमा ली कि उसके ऊपर सीधे २३८ करोड़ के भ्रष्टाचार का आरोप लग गया और उसे तत्कालीन नगरायुक्त ने हटाकर उसकी सेवाएं समाप्त कर दीं।

आगरा। मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की जीरो टोलरेंस की नीति को आगरा की मेयर पलीता लगा रही हैं। मेयर हेमलता दिवाकर ने भ्रष्टाचार में फंसे आरोपी को अपना ओएसडी बना लिया। मेयर के आदेश के बाद शहर भर में चर्चाएं तेज हो गईं। विपक्षी पार्षदों समेत अन्य दलों के नेताओं ने भी विरोध जताया है।

सिकंदरा के पश्चिमपुरी के रहने वाले राकेश बंसल ने २००८ में नगर निगम में आउटसोर्सिंग पर नौकरी ज्चाइन की थी। तत्कालीन नगरायुक्त श्याम सिंह यादव ने उसे अपना पीए बना लिया। आरोप है कि इसके बाद उसने अपने हाथ दिखाने शुरू किए। टेंडर पुलिंग और संविदा पर नौकरी दिलवाने और बिना काम कराए फर्जी फाइलों पर भुगतान कराए। राकेश बंसल पर २३८ करोड़ के भ्रष्टाचार का आरोप है। इसकी जांच विजिलेंस में चल रही है। राकेश बंसल के खिलाफ अकूत संपत्ति अर्जित करने का मामला हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है। राकेश बंसल की शिकायत बीजेपी विधायक डॉ. जीएस धर्मेश ने भी की है। नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए विधायक ने मेयर हेमलता से भी बात की है।

राकेश बंसल की संपत्ति
राकेश बंसल ने खिलाफ रोहित शर्मा और सपोर्ट इंडिया के अध्यक्ष अधिवक्ता सुरेश चंद सौनी ने शिकायत की है। राकेश बंसल और उसके परिवारजनों के नाम पर नोयडा में मार्केट, गुरुग्राम में एक होटल, सिकंदरा के शास्त्रीपुरम में एक नवनिर्मित स्कूल, १.५ करोड़ की ज्वेलरी, ५ करोड़ बैंक बैलेंस, एक करोड़ कैश हैं। इसके अलावा राकेश बंसल और उनकी पत्नी रिचा बंसल के नाम पर सिकंदरा के राधा नगर में एक मकान और बंसी विहार में ५ प्लाट, एक मकान है। मां सुशीला और छोटे भाई उमेश बंसल के नाम पर एक प्लाट और एक मकान है। घर में होंडा सिटी, वैगन आर कार, मंहगी घडिय़ां और शस्त्र हैं।

नगरायुक्त ने कर दी थी सेवा समाप्त
२००८ में नगरायुक्त का पीए बनने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। अरुण प्रकाश के नगरायुक्त बनने के दौरान जमकर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगा है। आरोप है कि फाइलों को कराने में मोटा कमीशन खाता था। १०० फाइलों में ५० का कमीशन अधिकारियों और ५० का कमीशन खुद खा जाता था। लगातार संपत्ति बढऩे और भ्रष्टाचार का मामला खुलने पर वर्ष २०२१ में तत्कालीन नगरायुक्त निखिल टीकाराम फुंडे से राकेश बंसल को हटा दिया और उसकी सेवाएं समाप्त कर दीं।

मामले में जांच की मांग कर रहे
आम आदमी पार्टी के नेता कपिल वाजपेई का कहना है कि जो भ्रष्टाचारी की नियुक्ति से मेयर की मंशा साफ दिखाई दे रही है। ओएसडी की नियुक्ति का अधिकारी नगर आयुक्त को है। इसकी जांच डीएम से कराएंगे। बीजेपी ब्रजक्षेत्र अध्यक्ष दुर्गविजय सिंह शाक्य का कहना है कि जो भ्रष्टाचार में फंसा है। उससे मेयर को दूरी बनानी चाहिए। इस बारे में बात करूंगा। समाजवादी पार्टी के नेता वाजिद निसार का कहना है कि नगर निगम में हजारों कर्मचारी हैं। किसी स्वच्छ छवि वाले कर्मचारी को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।

क्या बोलीं मेयर

मेयर हेमलता दिवाकर ने कहा कि राकेश कोई सरकारी कर्मचारी नहीं है। उसके ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। अभी तक साबित तो नहीं हुए हैं। मेरी नजर में वह ठीक है। भ्रष्टाचार साबित हो जाएंगे तो उसे हटा दिया जाएगा।

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