Sunday, June 23, 2024
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झोलाछापों ने नहीं कराया है रजिस्ट्रेशन और नहीं है डिग्री

अस्पताल की आड़ में चल रहे गर्भपात केंद्र
समाजसेवी ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर की लिखित शिकायत
पिनाहट। कस्बा पिनाहट में बिना रजिस्ट्रेशन व डिग्री के झोलाछापों ने दुकान व मकान में अवैध अस्पताल में क्लीनिक खोल रखे हैं। अवैध अस्पतालों में अप्रशिक्षित नर्सों से डिलीवरी व गर्भपात कराए जा रहे हैं। पूर्व में भी झोलाछापों के इलाज से अवैध अस्पताल व क्लीनिक पर कई मरीजों की मौत हो चुकी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर अपना पल्ला झाड़ देता है। पिनाहट में अवैध रूप से संचालित अस्पतालों की शिकायत समाजसेवी ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर की है।
जानकारी के अनुसार कस्बा पिनाहट में बिना रजिस्ट्रेशन व बिना डिग्री झोलाछापों ने मकान व दुकान में अवैध अस्पताल व क्लीनिक खोल रखे हैं। इन झोलाछापों के क्लीनिक व अस्पतालों में कोई भी प्रशिक्षित चिकित्सक तक नहीं है। झोलाछाप ही अवैध रूप से संचालित अस्पताल व क्लीनिक में गंभीर मरीजों का भी इलाज कर रहे हैं। जिसके चलते आए दिन मरीजों की मौत होती रहती है। अस्पताल की आड़ में अप्रशिक्षित स्टाफ नर्सों से डिलीवरी व गर्भपात भी कराया रहे हैं। पिनाहट में तीन अवैद्ध अस्पतालों में सरकार के सख्त आदेशों के बाद भी गर्भपात केंद्र चल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के संरक्षण में बड़े पैमाने पर गांव-गांव गली-गली झोलाछापों ने अवैध अस्पताल व क्लीनिक खोल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के संरक्षण में पल रहे अवैध अस्पताल संचालक व झोलाछाप इलाज के नाम पर मरीजों को मौत बांट रहे हैं। पूर्व में भी झोलाछाप के इलाज से कई मरीजों की मौत हो चुकी है, लेकिन इनकी जड़ें इतनी मजबूत है कि शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती है। स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर अपना पल्ला झाड़ देता है। मानवाधिकार आयोग के जिलाध्यक्ष तपेंद्र सिंह राजपूत ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर लिखित शिकायत करते हुए आरोप लगाया है कि पिनाहट ब्लॉक क्षेत्र के पिढ़ौरा, करकौली, बासौनी,भदरौली,अरनोटा, स्याही पुरा व कस्बा पिनाहट में सरकारी अस्पताल के आसपास बड़े पैमाने पर अवैध अस्पताल संचालित है। अस्पताल की आड़ में गर्भपात कराये जा रहे हैं। झोलाछाप व अवैध हॉस्पिटल संचालक कार्रवाई से बचने के लिए अवैद्ध क्लीनिक व अस्पताल के बाहर अपना बोर्ड तक नहीं लगाते। और जब स्वास्थ्य विभाग छापामार कार्रवाई करने पहुंचता है तो छापामार कार्रवाई की सूचना पहले ही लीक हो जाती है। पीड़ित ने इस पूरे मामले की सीएम पोर्टल पर मुख्यमंत्री से शिकायत करते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है। बताया जा रहा है इन्होंने न तो रजिस्ट्रेशन करा रखा है और न ही डिग्री ले रखी है।

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