Thursday, June 13, 2024
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नौकरी के नाम पर दोस्त ने दोस्त को ठगा, फर्जी नियुक्ति पत्र देकर ४० लाख की ठगी

साथ में पढ़ता है आरोपी, मां के साथ मिलकर किया जालसाजी का खेल,

जलकल विभाग में नौकरी दिलाने का दिया था झांसा, जीएम से बताई थी पहचान

आगरा। एक दोस्त ने अपनी मां के साथ मिलकर बचपन में साथ पढ़े सहपाठी को सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर चालीस लाख ठग लिए और नकली कागज पकड़ा दिए, जब पीडि़त ने पैसे वापस मांगे तो पहले बहाने बनाए और फिर धमकाना शुरू कर दिया। मजबूर पीडि़त ने पुलिस से शिकायत की है।

अपने साथ पढ़ाई करने वाले दोस्त को जलकल कर्मचारी ने बर्बाद कर दिया। खुद के जीएम जलकल से संबंध होने का दावा करके अपनी मां के साथ मिलकर साजिश करते हुए सरकारी नौकरी लगवाने का दावा किया। पीडि़त ने भरोसा कर खुद और अपने तीन रिश्तेदारों से पैसे दिलवा दिए। पैसा मिलने के बाद आरोपी जलकल कर्मी ने नकली नियुक्ति पत्र पकड़ा दिए। नौकरी ज्वाइन करने पहुंचने पर ठगी का अहसास हुआ तो आरोपी मां – बेटे ने पहले चेक दिए जो बाउंस हो गए और फिर कुछ दिन तक बहाने बनाने के बाद सीधे धमकी देना शुरू कर दिया। पीडि़त ने थाना पुलिस को शिकायत की और जांच के बाद थाना सदर पुलिस ने आरोपी मां – बेटे के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

धोखेबाज की मां ने दिलाया था भरोसा
बमरौली अहीर अंतर्गत दीक्षा के सी आर टाउन निवासी विशाल शर्मा ने बताया कि उनके साथ बचपन में पढ़े हुए बालूगंज निवासी हर्षित शर्मा पुत्र स्व अशोक शर्मा जलकल विभाग में मृतक आश्रित कोटे से नौकरी करता है। साल 2020 में एक मंदिर में मुलाकात होने के बाद उसकी मां शशि ने बेटे हर्षित के जल कल विभाग के जीएम आर एस यादव के साथ अच्छे संबंध होने की बात कहते हुए दस लाख रुपए में सरकारी नौकरी लगवाने की बात कही। पीडि़त विशाल ने अपने रिश्तेदार राहुल उपाध्याय, रोहित उपाध्याय, अमन दुबे से बात की और उनके राजी होने पर उनसे पैसे लेकर अपने खाते में रख लिए।विशाल ने अपने खाते से हर्षित और उसकी मां के खातों में 32 लाख 30 हजार ऑनलाइन दिए,एक लाख रुपए अपने साथी से ट्रांसफर करवाए और शेष पैसा नकद दे दिया। 13 जुलाई 2021 को आरोपी ने नियुक्ति पत्र सौंप दिए।

फर्जी निकले नियुक्ति पत्र
आरोप है कि नियुक्ति पत्रों में उनको किसी कर्मचारी का बेटा बनाकर मृतक आश्रित कोटे में नौकरी दी गई थी। उन्होंने कोई परेशानी न होने का आश्वासन दिया और जब वो लोग जलकल आगरा पहुंचे तो वहां नियुक्ति पत्रों के नकली होने की जानकारी मिली। काफी बहस के बाद उन्होंने अपने खातों के तीन चेक दिए। बैंक में डालने पर सभी चेक बाउंस हो गए। इसके बाद आरोपियों ने अपना मकान बिकने की बात कहकर नकद पैसे देने को कहकर काफी इंतजार करवाया और अब धमकियां देना शुरू कर दिया है। परेशान होकर पीडि़तों ने सारे सबूत के साथ पुलिस कमिश्नर प्रीतिंदर सिंह से मुलाकात की और फिर कमिश्नर के आदेश पर थाना सदर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। यहां यह भी बता दें की जलकल विभाग में इस तरह की ठगी के मामले पहले भी सामने आए हैं। आरोपी और भी कई लोगों को ऐसे ही चूना लगा चुका है।

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