Tuesday, June 18, 2024
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भ्रष्टाचारी को ओएसडी बनाने पर चौतरफा घिरीं महापौर, शहर भर में लगे पोस्टर

भ्रष्टाचार के आरोपी को अपना ओएसडी नियुक्ति करने के मामले में हेमलता दिवाकर सुर्खियों में हैं। आउटसोर्स कर्मचारी जिसे 2008 में पांच हजार रुपये मिलते थे। उस पर 238 करोड़ के भ्रष्टाचार का आरोप लगा है। 17 जुलाई को महापौर हेमलता दिवाकर ने ओएसडी के पद पर राकेश बंसल की नियुक्ति का पत्र जारी किया था।

नगर निगम के अधिनियम के विपरीत जाकर जारी किया था नियुक्ति पत्र
आगरा दौरे पर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दे चुके हैं नसीहत

आगरा। 238 करोड़ के भ्रष्टाचार में फंसे नगर निगम के आउटसोर्स कर्मचारी राकेश बंसल की नियुक्ति पर महापौर हेमलता दिवाकर चौतरफा घिर गईं हैं। शुक्रवार की रात को शहर भर में महापौर और राकेश बंसल के पोस्टर चस्पा हुए हैं। शनिवार सुबह सोशल मीडिया पर पोस्टर वायरल हो गए। पोस्टरों को लेकर हेमलता दिवाकर का पुराना नाता रहा है। विधायक होते हुए उनके विधानसभा क्षेत्र आगरा ग्रामीण में लापता के पोस्टर भी चस्पा किए गए थे।

जीरो टोलरेंस की नीति पर काम करने वाली बीजेपी सरकार की मेयर हेमलता दिवाकर ने भष्टाचार के आरोपी राकेश बंसल को अपना ओएसडी बनाया था। 17 जुलाई को इस संबंध में उन्होंने नियुक्ति पत्र भी जारी किया था। इसके बाद शहर की सरकार में जबर्दस्त बहस छिड़ गई। बजट सत्र पर हुए सदन का विपक्षी दलों ने बहिष्कार कर दिया। ये मामला सुर्खियों उठा तो शासन स्तर तक पहुंच गया। 25 जुलाई को आगरा आए सीएम योगी आदित्यनाथ ने सर्किट हाउस में ली बैठक में कहा था कि नगर निगम में कोई बाहरी व्यक्ति को महत्वपूर्ण कार्य नहीं दिया जाए। सरकारी कर्मचारियों को पदों पर नियुक्त किया जाए। इशारों-इशारों में सीएम नसीहत दे गए थे।

शहर में चस्पा हुए पोस्टर
महापौर हेमलता दिवाकर के निर्णय से नगर निगम से लेकर शहर भर में विरोधभाष की स्थिति है। यही वजह है कि शहर के कई क्षेत्रों में राकेश बंसल और महापौर के नाम से पोस्टर चस्पा किए गए हैं। ये पोस्टर नगर निगम परिसर, सूर सदन चौराहा, संजय प्लेस आदि क्षेत्रों में चस्पा किए गए हैं। शनिवार सुबह जब लोगों से पोस्टर देखे तो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए।

क्या कहती हैं महापौर
महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाह ने राकेश बंसल की नियुक्ति पर कहा था कि राकेश बंसल कोई सरकारी कर्मचारी नहीं है। उस पर केवल भ्रष्टाचार का आरोप लगा है जो कि अभी साबित नहीं हुआ है। आरोप साबित होते ही उसे हटा दिया जाएगा। इस बारे में महापौर हेमलता दिवाकर से कई बार उनके मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकीं हालांकि उनके पीएस हर्ष का कहना है कि जब से राकेश बंसल की नियुक्ति की बात हुई है उसने कभी भी काम नहीं किया। उन्होंने बताया कि नियुक्ति का अधिकारी मेयर का नहीं है।

शुरू से ही संदिग्ध रही बंसल की भूमिका
राकेश बंसल वर्ष 2008 में आउटसोर्स कर्मचारी के तौर पर भर्ती हुआ था। इसके बाद उसे नगरायुक्त का पीए का पद मिल गया। आरोप है कि राकेश बंसल ने भ्रष्टाचार का बढ़ावा दिया। इस वजह से उसे वर्ष 2009 में तत्कालीन नगरायुक्त अनिल कुमार ने हटा दिया। नगरायुक्त के जाते ही उसने अपने रसूख का प्रयोग किया और फिर से पीए के पद पर काबिज हो गया। 2014 में राकेश बंसल की सुरेश दीपक और कुंवर सिंह ने शिकायत की थी। वर्ष 2020 में 1.45 करोड़ के कमीशन के आरोप में तत्कालीन नगरायुक्त निखिल टीकाराम फुंदे से राकेश बंसल की सेवाएं समाप्त उसे बर्खास्त कर दिया था। राकेश बंसल के खिलाफ रोहित शर्मा और सपोर्ट इंडिया के अध्यक्ष अधिवक्ता सुरेश चंद सौनी ने शिकायत की है। जिसकी जांच प्रचलित है।

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