Thursday, June 13, 2024
HomeUncategorizedआंबेडकर विश्वविद्यालय ईडी रेड...

आंबेडकर विश्वविद्यालय ईडी रेड…

मेडिकल स्टूडेंट्स की कॉपियां बदलने का प्रकरण…

फर्जीवाड़े में जेल जा चुके आउटसोर्स कर्मचारी से गोपनीय कार्य करा रहे थे विश्वविद्यालय के अधिकारी

मेडिकल स्टूडेंट्स की कॉपियों के बदलने का मामला २७ अगस्त २०२२ को आगरा पुलिस ने पकड़ा था। एक आउटसोर्स कर्मचारी विश्वविद्यालय की गाड़ी लेकर नोडल सेंटर से कॉपियां लेकर आया था। कॉपियां बदलने की सूचना पर पुलिस ने आरोपी को पकड़ लिया। पूछताछ में कई लोगों के नाम सामने आए थे।

आगरा। मेडिकल स्टूडेंट्स की कॉपियां बदले के प्रकरण की जांच ईडी कर रही है। ये मामला २७ अगस्त २०२२ को प्रकाश में आया था। विश्वविद्यालय का एक आउटसोर्स कर्मचारी बीएएसएस की कॉपियों के साथ पकड़ा गया था। तत्कालीन डीसीपी सिटी विकास कुमार ने कॉपी बदले जाने की सूचना पर जांच की तो कॉपियों के बंडल से २५० कॉपियां गायब मिलीं। इसके साथ ही १४ कॉपियां ऐसी मिलीं जो कि बदली गई थीं। पूछताछ में कई लोगों के नाम सामने आए जिन्हें हरीपर्वत थाना पुलिस ने जेल भेजा था। इसके बाद एसआईटी, सीबीआई और फिर प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है। इस पूरे मामले में विश्वविद्यालय के अधिकारियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि एक आउटसोर्स कर्मचारी को इतना महत्वपूर्ण गोपनीय कार्य किसने सौंप दिया जो कि नोडल सेंटरों से छात्रों की कॉपियां लेकर आ रहा था।

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में फर्जीवाड़े की फेहरिस्ट बहुत लंबी है। यही वजह है कि कई कुलपति और अधिकारियों के खिलाफ कई मामलों भ्रष्टाचार की जांच चल रही है। फिलहाल बात करते हैं मेडिकल स्टूडेंट्स की कॉपियों के बदले जाने की। जिसकी जांच ईडी कर रही है। बीते शुक्रवार की शाम को ईडी की टीम ने विश्वविद्यालय में रेड की थी। विश्वविद्यालय के खंदारी परिसर से ३०० संदिग्ध कॉपियों को ईडी की टीम अपने साथ ले गई है। इस प्रकरण में ईडी की टीम ने विश्वविद्यालय के कई अधिकारियों से रातभर पूछताछ की और सुबह छह बजे टीम रवाना हो गई।

ऐसे खुला मामला
डीसीपी सिटी विकास कुमार ने २७ अगस्त को देवेंद्र सिंह नामक विश्वविद्यालय कर्मचारी को पकड़ा था। उन्हें सूचना मिली थी कि देवेंद्र सिंह विश्वविद्यालय के नोडल सेंटर से बीएएमएस (मेडिकल स्टूडेंट्स) की कॉपियों को लेकर आ रहा है। उससे रास्ते में छात्रों की कॉपियां गायब कर दी हैं। इस सूचना पर चेकिंग में मामला पकड़ में आया। देवेंद्र सिंह ने छात्र नेता राहुल पाराशर का नाम बताया, राहुल ने दिल्ली के डॉक्टर अतुल यादव का नाम बताया, इसके अलावा दो अन्य दुर्गेश ठाुकर और पुनीत कुमार को भी अरेस्ट किया गया। इन्हें जेल भेजा गया था।

दागी कर्मचारी को किसने दिया गोपनीय कार्य
देवेंद्र सिंह विश्वविद्यालय में आउटसोर्स पर चालक की नौकरी करता है। देवेंद्र सिंह मथुरा के छाता थाने से फर्जीवाड़े के मामले में जेल जा चुका है। इसकी जानकारी विश्वविद्यालय के अधिकारियों को है, लेकिन इसके बावजूद भी उसे नौकरी पर रखा गया। इसके अलावा सबसे अहम बात यह है कि दागी आउटसोर्स कर्मचारी पर इतना भरोसा किस अधिकारी ने जताया कि उसे विश्वविद्यालय का गोपनीय कार्य सौंप दिया गया। जबकि विश्वविद्यालय में कई स्थाई चालक तैनात हैं। क्या वे लोग गोपनीय कार्य करने के लायक नहीं थे जो कि एक दागी व्यक्ति को कार्य दे दिया गया। ये सवाल विश्वविद्यालय के अधिकारियों की कार्यशैली पर उठ रहे हैं।

अधिकारियों की संलिप्तता के जुड़ रहे हैं तार
इस प्रकरण की जांच देश की बड़ी जांच एजेंसी कर रही है। सूत्रों की मानें तो जांच एजेंसी की रडार पर विश्वविद्यालय के कई अधिकारी आ चुके हैं। कुलपति रहे प्रफेसर विनय पाठक इस मामले की जांच करवा रहे हैं। ईडी एफआईआर कराने वाले विश्वविद्यालय के अधिकारी, गोपनीय विभाग के अधिकारी और प्रकाशन विभाग के अधिकारियों से पूछताछ कर चुकी है। जानकारी के अनुसार ईडी के निशाने पर वे अधिकारी हैं जिन्होंने विश्वविद्यालय के गोपनीय कार्य को दागी कर्मचारी को सौंपा था।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments