Thursday, June 13, 2024
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दयालबाग बवाल में पुलिस के तेवर ढीले

हाईकोर्ट से आज सायंकाल तक के लिए मिला स्थगनादेश
नहीं हो सका मुकदमा, सत्संगी मानवाधिकार की शहर मेंं
सत्संगियों के तेवर पूरी तरह कायम, जुटे हुए हैं खेतों में

आगरा। सत्संगियों के तेवर कायम हैं, वहीं पुलिस के तेवर ढीले पढ़ चुके हैं। पुलिस खुद पर और अन्य लोगों पर हुए पथराव, हमले में रिपोर्ट ही नहीं दर्ज कर सकी। इसी बीच सत्संगियों ने हाइकोर्ट से बुधवार तक का स्थगनादेश हासिल कर लिया। अब पुलिस और प्रशासन के अधिकारी कह रहे हैं कि हाईकोर्ट के निर्देश का इंतजार किया जा रहा है। पूरे मामले की जानकारी मिलने के बाद सूबे के मुख्यमंत्री भी पुलिस, प्रशासन के अधिकारियों से नाराज हैं। उनका कहनाहै कि संवादहीनता से बात बिगड़ी। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि संवाद करके समस्या का हल निकाला जाए।
दयालबाग में पुलिस और सत्संगियों के बीच हुए टकराव के बाद अब पुलिस और प्रशासन भी शांत हो गए हैं। सोमवार रात को मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉल के जरिए अधिकारियों से बातचीत की। मुख्यमंत्री ने इस मामले में अधिकारियों को संवाद बनाए रखने के लिए चेतावनी दी। वहीं, पुलिस ने अब मामले को यहीं रोकने के लिए अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। रविवार रात को घायल हुए पुलिसकर्मियों के मेडिकल और तहरीर लिखने के बाद मुकदमा दर्ज नहीं नहीं किया गया। चोटिल मीडियाकर्मी की तहरीर पर भी मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। वहीं, सत्संग सभा अब पुलिस और प्रशासन को कोर्ट और मानवाधिकारी आयोग के जरिए घेरने की तैयारी में जुट गए हैं। प्रशासन की कार्रवाई को रोकने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी है, इस पर 27 सितंबर को सुनवाई होगी।
सत्संग सभा के अनुयायियों के बीच में सोमवार को दोपहर 12 बजे से डीएम भानु गोस्वमी के ट्रांसफर की अफवाह उड़ गई। ग्रुप में पोस्ट होने लगा कि डीएम का ट्रांसफर हो गया है। इतना ही नहीं उनके प्रयागराज डीएम से ट्रांसफर होने की खबर के लिंक भी पोस्ट किए गए। सत्संगियों ने इस पर खुशी जताई। हालांकि ये महज अफवाह ही थी।
मुख्यमंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में भी अधिकारियों को केवल हिदायत दी। उनसे कहाकि हापुड़ और आगरा जैसे मामले बेहद संवेदनशील होते हैं। ये बड़ी संस्थाएं हैं। यहां पर बडेÞ अधिकारियों को स्वयं उपस्थित होना चाहिए था। संवादहीनता नहीं होनी चाहिए। राजस्व से जुडेÞ मामले संवाद से निस्ताारित होने चाहिए। भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति न हो। सीएम की हिदायत के बाद अधिकारियों ने राहत की सांस लीं। इससे पहले उनका हलक सूख रहा था। उन्हें लग रहा था कि सीएम इस मामले में किस तरह से रिएक्ट करेंगे।
पुलिस अब हमले के मामले में पूरी तरह से बैकफुट पर है। रविवार की रात को घायल पुलिसकर्मियों का मेडिकल कराया गया था। रात को थाने में मीटिंग हुई। इसके बाद रात को ही तहरीर लिखवाई गई। मगर, तहरीर लिखने के बाद अभी तक मुकदमा नहीं हुआ है। वहीं, घायल मीडियाकर्मी ने सत्संग सभा के चार लोगों को नामजद करते हुए तहरीर दी है, लेकिन उसकी तहरीर पर भी मुकदमा नहीं हुआ है।
इतनी बड़ी घटना होने और प्रशासन द्वारा दो बार अवैध कब्जा हटाने के बाद भी सत्संगियों के तेवर में कोई अंतर नहीं है। वो सोमवार को भी कहते रहे कि जमीन उनकी है। कोई सरकारी रास्ता नहीं है। अपनी जमीन पर वो गेट भी लगाएंगे और फेंसिंग भी करेंगे, उन्हें कोई रोक नहीं सकता। वहीं, सत्संगियों द्वारा पीएम और सीएम को भी शिकायती पत्र भेजे गए हैं। उसमें भी पुलिस पर बर्बरता का आरोप लगाया गया है।

 

एंटी भू-माफिया टास्क
फोर्स की बैठक टली
बैकफुट पर आए प्रशासन ने एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स की बैठक भी टाल दी। इसमें राधा स्वामी सत्संग सभा के अध्यक्ष गुरु प्रसाद सूद, उपाध्यक्ष प्रेम प्रकाश श्रीवास्तव, अनूप श्रीवास्तव को भू-माफिया घोषित किए जाने पर फैसला होना था। अब कहा जा रहा है कि यह बैठक 30 सितंबर को होगी। लेकिन जिस तरह प्रशासन दबाव में आया है, उससे लगता है कि कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाली जा रही है।
एडीएम प्रशासन अजय कुमार सिंह का कहना है कि प्रशासन सार्वजनिक रास्तों पर हुए कब्जों के संबंध में अपना पक्ष हाईकोर्ट में रखेगा। कोर्ट का निर्णय आने तक कार्रवाई नहीं की जाएगी। चकबंदी के रिकॉर्ड में रास्ते सार्वजनिक हैं। जिन पर सभी का अधिकार है। किसी एक संस्था या व्यक्ति का कब्जा नहीं हो सकता। जिन संपत्तियों पर कब्जा है, उन्हें खाली होना चाहिए।
बता दें कि तहसील स्तरीय टास्क फोर्स ने भू-माफिया घोषणा से संबंधित प्रस्ताव डीएम के पास प्रस्ताव भेजा था। जिसमें डीएम ने और सबूत जुटाने के आदेश दिए थे। इस पर कब्जों का ड्रोन से दोबारा सर्वे कराया गया। प्रभावित किसान व ग्रामीणों के बयान दर्ज किए। वीडियोग्राफी कराई गई थी।

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