Thursday, June 13, 2024
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एयरफोर्स दिवस : वायु सेना के लिए खास है खेरिया एयरबेस

बालाकोट में एयरस्ट्राइक के दौरान रखी गई थी नींव
1947 से 49 के बीच कश्मीर रही अहम भूमिका

आगरा। खेरिया एयरफोर्स में आज उत्साह का माहौल है। यहां एयरफोर्स दिवस मनाया जा रहा है। वायु सेना के लिए खेरिया एयरबेस बेहद खास है। आजादी के बाद बालाकोर्ट में एयर स्ट्राइक के बाद इस एयरबेस की नींव रखी गई थी।
दूसरे विश्व युद्व से लेकर पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक तक आगरा एयरफोर्स बेस स्टेशन हर आॅपरेशन की नींव रहा है। आजादी के दिन खेरिया एयरफोर्स स्टेशन ने स्थापना के तुरंत बाद ही 1947 से 49 के बीच कश्मीर घाटी में भारतीय सेना की टुकड़ियां पहुंचाई, वहीं लेह के दुर्गम इलाके में पहली बार विमान की लैंडिंग कराई। स्क्वाड्रन 12 इस एयरबेस से जुड़ा रहा है। 1965, 1971, करगिल युद्व के अलावा बालाकोट एयर स्ट्राइक समेत बड़े आॅपरेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पाकिस्तान और चीन पर निगरानी रखने वाले अवाक्स सिस्टम भी यहीं से संचालित हैं। देश का इकलौता पैराट्रूपर्स ट्रेनिंग कॉलेज भी आगरा में है, जहां पैरा कमांडो ट्रेनिंग के लिए आते हैं।
देश की आजादी के दिन यानी 15 अगस्त 1947 को विंग कमांडर शिवदेव सिंह की कमान में आगरा एयरफोर्स स्टेशन शुरू किया गया। पहले यह पश्चिमी कमान में था, पर 1971 में यह सेंट्रल एयर कमांड का हिस्सा बन गया। यहां डकोटा, कैनबरा, एएन-12, एचएस 748, सी-119, सी-47 जैसे विमानों ने अपनी सेवाएं दी हैं। आगरा की सामरिक अहमियत समझते हुए द्वितीय विश्व युद्घ में अमेरिका ने खेरिया हवाई अड्डे को अपना बेस बनाया। तब से रॉयल एयरफोर्स यहां आॅपरेशन चलाती रही। उसी दौरान यहां एयरपोर्ट बनाने की कवायद शुरू की गई। एत्मादपुर में भी जमीन देखी गई, लेकिन खेरिया को ही बाद में विस्तार दे दिया गया। आजादी के 75 सालों में भी एशिया के बड़े एयरफोर्स स्टेशनों में शुमार आगरा एयरबेस पर इंटरनेशन एयरपोर्ट नहीं बन पाया।

क्यों मनाते हैं वायुसेना दिवस?
हर साल इस दिन को बहुत ही जोश व उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य देश के लोगों के लिए सशस्त्र बल वायुसेना के योगदान को समझाना और सराहना करना होता है। भारतीय वायुसेना दिवस वीर और सेवानिवृत्त अधिकारियों को सलामी और सम्मान देने का मौका प्रदान करता है। यह दिन भारतीय सुरक्षा बलों के जवानों के योगदान को याद करने और उनके साहस और बलिदान को मान्यता देने के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर होता है। इस मौके पर वायुसेना अलग-अलग स्थलों पर आकाशीय डिस्प्ले, पैरेड और अन्य कार्यक्रम आयोजित करती है, जिन्हें लोग उपस्थित होकर देखते हैं।

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