Tuesday, June 18, 2024
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18 घंटे बाद हो सका शव का पोस्टमार्टम

यह कैसी व्यवस्था, मुर्दों को भी करनी पड़ती है प्रतीक्षा
दुर्घटना का शिकार जितेंद्र खंदौली के रहने वाला था

आगरा। प्रदेश शासन ने सूर्यास्त के बाद अस्पतालों में पोस्टमार्टम कराने की व्यवस्था के आदेश दिए थे। कहा गया था जिन अस्पतालों में व्यवस्थाएं हैं, वहां रात में पोस्टमार्टम शुरू कर दिया जाए। उक्त व्यवस्था का उद्देश्य मृतकों के स्वजन को राहत देना था। लेकिन इस व्यवस्था का माखौल उड़ाया जा रहा है।
मामला खंदौली का है। यहां के रहने वाले जितेंद्र की हादसे में जान चली गई। जवान बेटे की मृत्यु से रात से घर में कोहराम मचा हुआ है। मंगलवार रात शव को मोर्चरी में रखवा दिया था। पूरी रात आंखों में काटी, सुबह आठ बजे थाने पहुंचकर 10 बजे तक पंचनामा की प्रक्रिया पूरी करा ली। इसके बाद भी समय पर पोस्टमार्टम नहीं हुआ। परिवार के लोग भूखे-प्यासे और रात भर रोते रहे। अंतिम संस्कार के लिए शव के पहुंचने की प्रतीक्षा करते रहे।
खंदौली के गांव पिरौठा के रहने वाले सड़क दुर्घटना में मंगलवार की रात 10 बजे मृत 22 वर्षीय किसान जितेंद्र सिंह के स्वजन का दर्द छलक उठता है। दोपहर डेढ़ बजे तक डाक्टर नहीं आए थे। शाम छह बजे जितद्र के शव का पोस्टमार्टम होने पर स्वजन अंतिम संस्कार के लिए लेकर गांव लेकर गए। रात आठ बजे जितेंद्र का अंतिम संस्कार किया जा सका। यह अकेले जितेंद्र का मामला नहीं है। शवों के पोस्टमार्टम की प्रकिया से गुजरने वाले अधिकांश परिवारों को भारी कष्ट झेलना पड़ता है। सूर्यास्त के बाद पोस्टमार्टम के आदेश के दो साल के बाद भी व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं आया। एसएन मेडिकल कालेज परिसर स्थित मोर्चरी पर पोस्टमार्टम की प्रकिया सामान्यत: दोपहर दो बजे आरंभ होती है। विशेष मामलों में ही शव का पोस्टमार्टम जल्दी किया जाता है। सवाल उठता है कि जब विशेष मामलों और लोगों के लिए सूर्यास्त के बाद भी पोस्टमार्टम की कराने व्यवस्था है तो सामान्य लोगों को इससे क्यों वंचित किया जा रहा है।
पुलिस आयुक्त और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को लिखा पत्र
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) आगरा के पूर्व सचिव डा. संजय चतुर्वेदी कहते हैं मरने वाले सामान्य व्यक्ति के पोस्टमार्टम की प्रकिया 18 से से 24 घंटे में पूरी होती है। उनके परिवार के लिए प्रतीक्षा के यह घंटे बेहद पीड़ा भरी होती हैं। पोस्टमार्टम की प्रकिया में तेजी लाकर स्वजन को राहत प्रदान की जा सकती है। स्वजन को पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने में भी दो दिन लग जाते हैं। इस मामले में पुलिस आयुक्त और मुख्य चिकित्साधिकारी को पत्र लिखकर व्यवस्था में सुधार कराने का आग्रह किया गया है।

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