Thursday, June 13, 2024
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इस बार पांच नहीं छह दिन का है दीपोत्सव

12 और 13 नवंबर को, कब मनाएं दीपावली?

आगरा। दीपावली पर्व इस बार पांच नहीं छह दिन का है। आज धनतेसर से इसकी शुरूआत हो गई है। दिवाली का त्योहार कार्तिक अमावस्या को मनाया जाता है, लेकिन इस साल दिवाली की तारीख को लेकर असमंजस की स्थिति है। 12 नवंबर और 13 नवंबर, दो दिन दीपावली है। दीपावली कब मनाएं, इसे लेकर असंजस है।
दिवाली हर वर्ष कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। ये पर्व धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज पर संपन्न होता है। हर एक दिन खास और विशेष महत्व लिए है। इस बार दिवाली पर्व में पांच उत्सव होंगे लेकिन दिवाली छह दिनों की है। तिथियों में भुगत भोग्य यानी घटने-बढ़ने के कारण पर्व छह दिनों तक चलेगा। शुरूआत आज (10 नवंबर को) हो गई। 11 को रूप चतुर्दशी, 12 को दिवाली, 14 को गोवर्धन पूजा और 15 को भाई दूज मनाया जाएगा।
ऐसी मान्यता है कि लक्ष्मी जी की बड़ी बहन अलक्ष्मी नरक चौदस को प्रकट हुई थी। इस दिन सुबह तेल की मालिश करके स्नान करना शुभ बताया गया है, इससे अलक्ष्मी का प्रभाव नहीं पड़ता है और दरिद्रता दूर रहती है। छोटी दीपावली के दिन हनुमान जी की पूजा भी बड़े मनोयोग से की जाती है। इस दिन हनुमान जी को सिंदूर का चोला चढ़ाकर चूर में या आटे से बने मीठे खाद्य पदार्थ का भोग लगाया जाता है। इससे वह प्रसन्न होते हैं और अप्रत्यक्ष कष्ट का निवारण कर देते हैं। इस दिन शाम को 7 या 11 दीपक घर के मुख्य द्वार के बाहर जलाने चाहिए।
धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी का इसी दिन समुद्र मंथन से प्राकट्य हुआ था। यह कार्तिक मास की अमावस्या को मनाई जाती है। रात 12 बजे से प्रात:काल तक का समय महानिशा काल कहलाता है। इस दिन लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु गणपति, सरस्वती, हनुमान जी का पूजन करना चाहिए। दिवाली की पूजा हमेशा स्थिर लग्न में करनी चाहिए। चार स्थिर लग्न के अलावा भी दो अन्य लग्न ऐसे हैं जिनमें पूजा की जा सकती है।
धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी का इसी दिन (दीपावली पर) समुद्र मंथन से प्राकट्य हुआ था। यह कार्तिक मास की अमावस्या को मनाई जाती है। रात 12 बजे से प्रात:काल तक का समय महानिशा काल कहलाता है। इस दिन लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु गणपति, सरस्वती, हनुमान जी का पूजन करना चाहिए। दिवाली की पूजा हमेशा स्थिर लग्न में करनी चाहिए। चार स्थिर लग्न के अलावा भी दो अन्य लग्न ऐसे हैं जिनमें पूजा की जा सकती है।

यह है शुभू मुहूर्त
प्रात:काल 7:20 से 9:37 तक वृश्चिक लग्न
दोपहर 1:24 से 2:55 तक कुंभ लग्न
शाम को 6 बजे से 7:57 तक वृषभ लग्न। इस समय सभी लोगों को घरों में पूजा करनी चाहिए।
शाम 7:57 बजे से रात 10:10 तक भी घरों में पूजा कर सकते हैं।
अंतिम शुभ मुहूर्त अर्धरात्रि में 12:28 से लेकर 2:45 तक सिंह लग्न में है। जिन लोगों की पूजा किसी कारण से रह जाए वो अंतिम मुहूर्त में भी पूजन कर सकते हैं।

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