Saturday, June 22, 2024
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उगते सूर्य को अर्घ्य देकर हुआ छठ पर्व का समापन

घाटों पर सुबह रही भीड़, छठी मईया को अर्पित किया प्रसाद
आगरा। छठ महापर्व का आज सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर समापन हो गया। 36 घंटे का निर्जला व्रत पूरा किया। घाटों पर सुबह ही पूर्वांचल समाज के लोग पहुंच गए थे। ठंड में भी उगते सूर्य को पानी में खड़े होकर अर्घ्य दिया। अपने परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हुए छठी मईया से गलतियों की क्षमा याचना की।
सनातन परंपरा से जुड़े धार्मिक ग्रंथों में उगते हुए सूर्य देव की पूजा को अत्यंत ही शुभ और शीघ्र ही फलदायी बताया गया है। मान्यता है कि छठ व्रत की पूजा से जीवन से जुड़े सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। छठी मईया हर मनौती पूरी करती है। यमुना के घाटों पर इसी परम्परा का निर्वहन उत्साह के साथ किया गया।
इससे पूर्व अस्त होते सूर्य को भी अर्घ्य दिया गया। डूबते और फिर उगते सूर्य को अर्घ्य देकर यह संदेश भी दिया जाता है कि जो डूबता है वो उगता भी है। विपरीत परिस्थितियों से डर कर नहीं बल्कि उसका मजबूती से सामना करना चाहिए।
बता दें कि छठ पर्व की शुरूआत नहाय खाय से हुई। इस दिन से आज सुबह सूर्य को अर्घ्य देने तक शहर में पूर्वांचल समाज के लोगों ने पूरी श्रद्धा से इस पर्व को मनाया। घाटों पर विशेष पूजा के साथ ही घरों पर भी प्रसाद बना, पूजा हुई। कई जगह घरों की छतों और आंगन में मिट्टी और ईंटों से तालाब बनाकर अर्घ्य दिया। इन चार दिनों में 36 घंटे का निर्जला व्रत भी रखा जाता है। इस निर्जला व्रत की शुरूआत खरना के बाद हुई थी। दो दिन महिलाएं पानी भी नहीं पीती हैं। इसे कठिन व्रत माना जाता है।
कल शाम के बाद आज सुबह सुबह शहर के प्रमुख घाटों पर लोगों की भीड़ रही। दशहरा घाट, कैलाश घाट, बल्केश्वर घाट, हाथी घाट सहित अन्य घाटों पर भी लोगों ने अस्त और उगते सूर्य को अर्घ्य दिया। छठ पर्व में गन्ने का भी काफी महत्व है। इन चार दिनों में शहर की हर प्रमुख सब्जी मंडी में गन्ने बिके। प्रसाद के लिए सिंघाड़ा, कच्ची हल्दी, मूली आदि का भी काफी महत्व है।

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