Sunday, June 23, 2024
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वर्ल्ड पाइल्स डे : जंक फूड, शराब और तंबाकू बना सकते है बीमार

गलत खान-पान, अनियमित दिनचर्या से युवाओं में बढ़ रही बवासीर
10-12 साल के बच्चे भी रोगी बने, मलत्याग में आ रहीं दिक्कतें

आगरा। बवासीर गंभीर बीमारी बन चुकी है। 12 से 17 साल तक की उम्र के पांच फीसदी बच्चों और किशोरों में ये परेशानी मिल रही है। इस बीमारी में मरीजों को बहुत ही तकलीफों का सामना करना पड़ता है। मलत्याग करते समय खून निकलने और तेज दर्द की समस्या तो होती ही है, साथ ही साथ बैठने या फिर लेटने में भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
बच्चे अगर हफ्ते में तीन से चार दिन मोमोज, चाऊमीन, बर्गर, तली-भुनी चीजें खाते हैं तो वह पाइल्स का शिकार बन सकते हैं। शौच अनियमित है और शारीरिक व्यायाम नहीं करते तो सजग हो जाएं। यही हाल रहा तो उन्हें आगे चलकर बवासीर की दिक्कत हो सकती है। चिकित्सक बताते हैं कि 12 से 17 साल तक के पांच फीसदी में ये परेशानी मिलने लगी है। हालांकि समय रहते दवा और खानपान में सुधार से यह ठीक हो जाती है।
चिकित्सक बताते हैं कि पहले 12 से 18 साल तक के इक्का-दुक्का ही मरीज आते थे। अब इनकी संख्या करीब पांच फीसदी है। इनके मलद्वार में खुजली होने, मल त्याग करते वक्त दर्द होने और कभी-कभार रक्त आने की परेशानी मिल रही है। पूछताछ में पता चला है कि ये सप्ताह में तीन से चार दिन फास्टफूड और बाजार का तला भोजन खाते हैं। शारीरिक गतिविधियां कम दिखीं। कुछ का वजन भी बढ़ा मिला। पौष्टिक भोजन और खेलकूद अधिक करने से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
एसएन मेडिकल कॉलेज के सर्जन डॉ. हिमांशु यादव ने बताया कि देर तक बैठकर कार्य करने, नॉनवेज खाने, तंबाकू-शराब के कारण भी बवासीर (पाइल्स) तेजी से बढ़ रहा है। 18 से 24 साल तक के 5 फीसदी, 25 से 50 साल की उम्र के 40 फीसदी मरीज हैं। 51 साल से अधिक उम्र के 50 फीसदी मरीज हैं। इनके भोजन और सोने का समय बिगड़ा मिला। शुरूआत में इनको मलद्वार में खुजली, दर्द और रक्त आता है और मस्से स्थायी तौर पर बाहर आ जाते हैं। उन्होंने बताया कि ग्रेड एक और दो में खानपान सुधारने और दवा से बीमारी ठीक हो रही है। ग्रेड तीन और चार में दवा और लेजर थैरेपी से ठीक हो जाती है।
पाइल्स जैसे रोग से बचना है तो शराब-तंबाकू का सेवन न करें, नॉनवेज खाने से बचें। दिन में तीन से पांच किमी पैदल चलें। खूब पानी पीएं। सेब, पपीता समेत मौसमी फल खाएं। दाल, चपाती, हरी सब्जियां खाएं, रोजाना 250 ग्राम से अधिक सलाद खाएं। मैदे से बनी सामग्री से परहेज करें। तेज मसाले वाले और तले हुए भोजन को न करें। कोल्ड ड्रिंक पैकेट बंद भोजन, फास्ट फूड का सेवन न करें। शौच जाने से पहले एक-दो गिलास गुनगुना पानी पीएं। भोजन के बाद 30 मिनट टहलें, देर तक बैठकर कार्य न करें।

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