Sunday, June 23, 2024
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22 मुकदमे, मोस्ट वांटेड बिल्डर प्रखर को पकड़ नहीं पाई पुलिस

2.18 करोड़ की धोखाधड़ी के ताजा मामल में अभियोग
पुलिस ने खंगाली पूरी कुंडली, कई बार जा चुका है जेल

आगरा। चर्चित बिल्डर प्रखर गर्ग की कुंडली पुलिस ने खोज निकाली है। उसके खिलाफ 22 मुकदमे पंजीकृत हो चुके हैं। वह जेल भी जा चुका है। ताजा मामले में उस पर 2.18 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का आरोप लगा है। जानकार कहते हैं कि यह चालबाज होटल और संपत्तियां दिलाने के नाम पर नवधनाड्यों को अपने जाल में फांसता है। उसके खिलाफ कमला नगर थाने में धोखाधड़ी, अमानत में खयानत और आपराधिक षड्यंत्र की धारा में मुकदमा दर्ज होने के बाद से पुलिस उसे अभी तक नहीं खोज पाई है। उसकी करतूतों में उसकी पत्नी भी शामिल रहती है।
बिल्डर प्रखर गर्ग पर आरोप है कि उसने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जब्त भवन और होटल का सौदा कराया। पीड़ित का आरोप है कि आपराधिक षड्यंत्र के तहत कराए गए इन सौदों से उनके 2.18 करोड़ रुपये फंस गए। पीड़ित ने इस मामले में पुलिस आयुक्त से शिकायत की थी। उनके निर्देश पर मुकदमा दर्ज हुआ है
कमला नगर थाने में सुभाष शर्मा की तहरीर पर मुकदमा लिखा गया है। मुकदमे में द्वारिका पुरम कालोनी निवासी प्रखर गर्ग उनकी पत्नी राखी गर्ग, दीपक कपूरिया, विश्वनाथ सिंह (कल्पतरू मोटल्स औरंगाबाद मथुरा के अधिकृत हस्तक्षकर्ता), नीतू कुशवाह, अनुज सिंह कुशवाह (संजय प्लेस स्थित नोव् होटल के साझेदार) को नामजद किया गया है। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि कि प्रखर गर्ग से सालों पुरानी पहचान थी। लेन-देन भी होता था। 10 जनवरी 2022 को प्रखर गर्ग घर आए। अपनी चिकनी चुपड़ी बातों में फंसाया। कहा कि आवास विकास कालोनी सेक्टर 11 बी में एक भवन खरीद लो। कुछ दिन बाद वह उसका दूसरी जगह सौदा करा देंगे। मुनाफा हो जाएगा। वह तैयार हो गए। 10 मार्च 2022 को 85 लाख रुपये में भवन का सौदा कराया। 14 मार्च 2022 को 95 लाख रुपये में भवन को बिकवा दिया। आरोप है कि भवन खरीदते समय उन्होंने राखी गर्ग को आठ लाख रुपये कमीशन दिया था। इसके बाद 15 मार्च 2022 को आरोपित ने उन्हें संजय प्लेस स्थित नोवा होटल का सौदा कराया। यह सौदा 3.10 करोड़ में कराया। 1.24 करोड़ दिलाकर इकरारनामा करा दिया। इस दौरान उन्हें ईडी से नोटिस मिला। उन्हें पता चला कि जिस प्रोपर्टी के सौदे कराए गए वे ईडी में जब्त थी। कल्पतरू बिल्डर के खिलाफ ईडी के पास जांच है। कई करोड़ की प्रोपर्टी ईडी ने जब्त कर ली थी।
पीड़ित ने मुकदमे में आरोप लगाया है कि आरोपित बिल्डर प्रखर गर्ग आपराधिक साजिश के तहत इसी तरह लोगों को फंसाता है। ताकि उसका निजी फायदा हो सके। डीसीपी सिटी सूरज कुमार राय ने बताया कि तहरीर पर जांच के बाद मुकदमा दर्ज कराया गया है। पुलिस साक्ष्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई करेगी।

510 करोड़ देने की की थी घोषणा
बिल्डर प्रखर गर्ग पिछले दिनों उस समय सुर्खियों में आया था, जब उसने बांके बिहारी मंदिर कारिडोर निर्माण के लिए 510 करोड़ रुपए देने की घोषणा की थी। इसके बाद पुलिस ने उसकी कुंडली खंगाली। प्रखर गर्ग आपराधिक इतिहास रहा है। पुलिस की जांच में उनके बारे में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। बिल्डर की आपराधिक पृष्ठभूमि है और धोखाधडी और चेक बाउंस के 22 मामले उनके खिलाफ आगरा की अदालतों में लंबित हैं। एक मामले में तो पिछले साल वह जेल जा चुका है।
बताया जाता है कि हाई कोर्ट में प्रखर गर्ग ने बांके बिहारी कॉरिडोर निर्माण के लिए 510 करोड़ रुपये देने की अर्जी लगाई तो उत्तर प्रदेश शासन ने भी उसके बारे में जानकारी जुटाना शुरू कर दिया। इसी क्रम में एसएसपी मथुरा ने आगरा पुलिस से प्रखर गर्ग के बारे में जानकारी मांगी। इस पर आगरा में रिकॉर्ड खंगाले गए तो प्रखर गर्ग की पूरी कुंडली खुल गई। आगरा के पुलिस कमिश्नर डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने एसएसपी मथुरा को प्रखर गर्ग का आपराधिक इतिहास भेजा है, जिसमें बताया गया कि प्रखर गर्ग पर धोखाधड़ी, चेक बाउंस और अन्य धाराओं में 22 केस दर्ज हैं।

लापता चल रहा है कुख्यात
आरोप यह भी हैं कि प्रखर गर्ग ने कई लोगों को होटल और अन्य संपत्तियां दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी की है। वह जेल भी जा चुका है और जमानत पर बाहर है। जिन लोगों के साथ रकम के लेन-देन में धोखाधड़ी हुई है, वे प्रखर गर्ग के घर से लेकर पुलिस थानों और अदालतों में चक्कर काट रहे हैं। फिलहाल प्रखर गर्ग कहां रह रहा है, इसकी किसी को जानकारी नहीं है।

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